नई दिल्ली, 22 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत के साथ बढ़ते द्विपक्षीय संबंधों की सराहना करते हुए भारत में इटली के राजदूत एंटोनियो बार्तोली ने गुरुवार को कहा कि दोनों देशों के बीच परिणामोन्मुख साझेदारी में अभूतपूर्व प्रगति हो रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच बेहतर तालमेल को भी महत्वपूर्ण बताया।
बार्तोली ने एनडीटीवी वर्ल्ड समिट के सत्र ‘द वेस्ट, रीवायर्ड: द न्यू ट्रांसअटलांटिक ऑर्डर’ में हिस्सा लेते हुए यह बात कही। इस सत्र में यूरोपीय संघ के राजदूत जीन-एरिक पकेट, ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन और जर्मनी के राजदूत जैस्पर वीक भी शामिल हुए।
भारत-इटली विशेष रणनीतिक साझेदारी में पिछले कुछ वर्षों के दौरान हुए बदलावों पर पूछे गए सवाल के जवाब में बार्तोली ने कहा कि दोनों देशों के नेताओं के बीच तालमेल महत्वपूर्ण है और इससे राजनयिकों को भी मदद मिलती है। हालांकि, उन्होंने कहा कि केवल नेताओं के बीच अच्छा तालमेल पर्याप्त नहीं है, बल्कि दोनों देशों के हितों का एक-दूसरे के साथ मेल खाना भी जरूरी है।
उन्होंने कहा, “यह परिणामोन्मुख साझेदारी है और हम इसमें अभूतपूर्व प्रगति कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच कई ऐसे हित हैं, जो एक-दूसरे के अनुरूप हैं। उदाहरण के लिए, संपर्क और कनेक्टिविटी दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं। हम दोनों प्रायद्वीपीय देश हैं और अपने-अपने समुद्री क्षेत्रों को जोड़ने में हमारी रुचि है।”
इटली के राजदूत ने कहा कि भारत अपने विनिर्माण आधार को विकसित और मजबूत करना चाहता है, जबकि इटली यूरोप की दूसरी सबसे बड़ी औद्योगिक शक्ति है। ऐसे में दोनों देशों के बीच सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं।
बार्तोली ने बताया कि भारत और इटली ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के लिए एक रोडमैप तैयार किया है और उसकी प्रगति की निगरानी के लिए एक व्यवस्था भी बनाई गई है। दोनों देशों ने वर्ष 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। निवेश के क्षेत्र में भी प्रगति हो रही है।
उन्होंने कहा कि रक्षा, अंतरिक्ष, ऊर्जा, सुरक्षा और आवागमन जैसे क्षेत्रों में भी भारत और इटली के हित एक-दूसरे से मेल खाते हैं। यह सहयोग केवल इटली तक सीमित नहीं है, बल्कि यूरोप के साथ भी दोनों पक्षों के लिए लाभकारी है।
बार्तोली ने बताया कि दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने अगले वर्ष को भारत और इटली में संस्कृति एवं पर्यटन के वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। इससे दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क और आपसी समझ को बढ़ावा मिलेगा।
भारत की बढ़ती कूटनीतिक भूमिका पर बात करते हुए इटली के राजदूत ने कहा कि भारत अब वैश्विक मामलों में केवल दर्शक नहीं रह गया है। वह गुटनिरपेक्षता से बहु-संरेखण की नीति की ओर बढ़ा है और उसकी भूमिका निष्क्रिय से सक्रिय हुई है। उन्होंने कहा कि भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका के साथ उसकी जिम्मेदारियां भी बढ़ी हैं। इटली इस अधिक सक्रिय भूमिका का स्वागत करता है।
यूक्रेन संघर्ष के समाधान में भारत की बढ़ती भूमिका से जुड़े सवाल पर बार्तोली ने कहा कि आज दुनिया के विभिन्न हिस्सों में होने वाली घटनाओं का प्रभाव तुरंत वैश्विक स्तर पर महसूस किया जाता है। इसलिए किसी संघर्ष को केवल एक क्षेत्र की समस्या मानकर अलग नहीं रखा जा सकता।
उन्होंने कहा कि रूस की आक्रामकता और यूक्रेन युद्ध को केवल यूरोप की समस्या नहीं माना जा सकता। इसका कारण सिर्फ भौगोलिक स्थिति नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की बुनियाद पर पड़ने वाला असर भी है। इन घटनाओं का प्रभाव आम उपभोक्ताओं की जेब पर भी पड़ता है।
बार्तोली ने कहा कि ईंधन की कीमतों में वृद्धि को केवल यूक्रेन युद्ध से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। ईरान से जुड़े घटनाक्रम भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी तरह, काला सागर के रास्ते खाद्य आपूर्ति में बाधाएं और बाब-अल-मंदेब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर संभावित अवरोध भी वैश्विक खाद्य आपूर्ति को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया की विभिन्न समस्याएं आपस में जुड़ी हुई हैं और इन चुनौतियों के समाधान के लिए भी इस परस्पर निर्भरता को समझना जरूरी है।
इसी चर्चा के दौरान ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन ने चीन के सैन्य विस्तार, उसकी नौसैनिक तैनाती और अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों के परीक्षणों पर चिंता जताई।
ग्रीन ने कहा कि चीन के साथ ऑस्ट्रेलिया उन क्षेत्रों में सहयोग करता है, जहां ऐसा संभव है। जिन मुद्दों पर मतभेद हैं, वहां वह अपनी असहमति व्यक्त करता है और हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देता है।
उन्होंने बताया कि एक समय चीन के साथ आर्थिक संबंधों में गतिरोध के कारण ऑस्ट्रेलिया के लगभग 20 अरब डॉलर के व्यापार पर एक सप्ताह के भीतर असर पड़ा था। चीन को बेचे जाने वाले कई ऑस्ट्रेलियाई उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध नहीं रहे थे। हालांकि, उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया के उस व्यापार का लगभग 96 प्रतिशत हिस्सा दूसरे बाजारों में पहुंच गया, जिससे उसकी आर्थिक मजबूती और लचीलापन बढ़ा।
ग्रीन ने कहा कि जलवायु परिवर्तन सहित कई वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर चीन का सहयोग जरूरी है। व्यापार भी दोनों देशों के बीच सहयोग का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। हालांकि, उन्होंने चीन के तेजी से बढ़ते सैन्य विस्तार पर चिंता जताते हुए कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से किसी भी देश का सैन्य विस्तार इतनी तेजी से नहीं हुआ है। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच तस्मान सागर में चीनी नौसैनिक गतिविधियों और पर्याप्त पूर्व सूचना के बिना किए जाने वाले लाइव-फायरिंग अभ्यासों का भी उल्लेख किया।
ग्रीन ने कहा कि दक्षिण-पश्चिम प्रशांत क्षेत्र के छोटे द्वीपीय देशों के आसपास चीन द्वारा अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण किया जाना भी चिंता का विषय है और इस संबंध में कई सवालों के जवाब मिलने जरूरी हैं। उन्होंने कहा, “चीन के साथ हम जहां सहयोग कर सकते हैं, वहां सहयोग करते हैं, जहां असहमति जरूरी है, वहां असहमति जताते हैं और हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार काम करते हैं।”
