लखनऊ, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एक आम आदमी का अपने काम के लिए कार्यालय दर कार्यालय भटकना पूरे सिस्टम पर सवालिया निशान खड़ा करता है। किसी बुजुर्ग, युवा, महिला, किसान या जरूरतमंद को निराश लौटना पड़े और उसे समयबद्ध समाधान न मिले, तो लोक सेवा का उद्देश्य पूरा नहीं होता। नागरिक संतुष्टि ही किसी भी लोकसेवक का रिपोर्ट कार्ड है। उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक सक्षम, संवेदनशील और जवाबदेह बनाने के लिए सही व्यक्ति को सही पद पर तैनात करने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यक्षमता, उपलब्धियों और सक्सेस स्टोरी को वार्षिक गोपनीय आख्या (एसीआर) तथा पदोन्नति से जोड़ने की दिशा में काम होगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को लोकभवन में मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत ‘साधना श्रृंखला’ की उत्तरी क्षेत्रीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस अवसर पर तीन महत्वपूर्ण पहल की घोषणा करते हुए डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (उपाम) को एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने, पंचायतों और नगर निकायों के कार्मिकों की क्षमता बढ़ाने तथा ‘राइट पर्सन फॉर द राइट रोल’ की अवधारणा को प्रभावी बनाने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल प्रमाणपत्र हासिल करना नहीं, बल्कि नागरिकों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान, सरल प्रक्रियाएं और बेहतर जनसेवाएं सुनिश्चित करना है। उपाम और भारत सरकार के क्षमता विकास आयोग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में आठ राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारी एवं प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। सीएम योगी ने कहा कि आज भी किसी बुजुर्ग को पेंशन के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। सामान्य नागरिक की छोटी-छोटी समस्याओं का समाधान समय पर नहीं हो पाता।
‘ऑफिस-ऑफिस’ धारावाहिक का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि एक नागरिक का सामान्य से काम के लिए विभिन्न कार्यालयों में भटकना पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है। समस्याओं को जानबूझकर लटकाना या जानकारी के अभाव में समाधान न कर पाना, दोनों स्थितियां प्रशासन के लिए गंभीर हैं। एक अयोग्य व्यक्ति का जिम्मेदार पद पर बैठना भी खतरनाक है और एक लापरवाह व्यक्ति का वहां बने रहना भी। कई बार कर्मचारी अपने अधिकारों और पदोन्नति को लेकर सजग रहते हैं, लेकिन अपने दायित्वों के प्रति अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाते। इसलिए कार्मिकों की क्षमता का निरंतर विकास होना चाहिए, उनकी जिम्मेदारी स्पष्ट होनी चाहिए और उनके कार्य का मूल्यांकन भी होना चाहिए। बार-बार शिकायत के आदी व्यक्ति से अलग, एक सामान्य नागरिक की वास्तविक समस्या का समाधान प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। किसी बुजुर्ग, युवा, महिला, किसान या जरूरतमंद को निराश लौटना पड़े और उसे समयबद्ध समाधान न मिले, तो लोक सेवा का उद्देश्य पूरा नहीं होता।
मुख्यमंत्री ने क्षमता विकास आयोग से आग्रह किया कि उत्तर प्रदेश में क्षमता विकास के लिए उपाम को एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने की दिशा में सहयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल तकनीक शासन का स्वरूप तेजी से बदल रहे हैं। लोक सेवकों को इन बदलावों के अनुरूप सक्षम बनाना आवश्यक है। तकनीक शासन को गति दे सकती है, प्रक्रियाएं सरल कर सकती है और निर्णयों को बेहतर बना सकती है, लेकिन प्रशासन को संवेदनशील उसका सेवा भाव ही बनाएगा।
सीएम ने कहा कि इसके साथ ही ग्राम पंचायतों, नगर पंचायतों, नगर पालिका परिषदों और नगर निगमों के कार्मिकों की क्षमता विकास पर विशेष ध्यान दिया जाए। विकसित भारत और आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्थानीय निकायों को मजबूत, जवाबदेह और नागरिक केंद्रित बनाना होगा। पंचायतें और नगर निकाय शासन की बुनियादी इकाइयां हैं। इनकी कार्यक्षमता मजबूत होगी, तभी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंचेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘राइट पर्सन फॉर द राइट रोल’ यानी सही भूमिका के लिए सही व्यक्ति की अवधारणा को प्रभावी बनाया जाए। उन्होंने क्षमता विकास आयोग से उपाम के साथ मिलकर अधिकारियों और कर्मचारियों की उपलब्धियों, कार्य प्रदर्शन और सक्सेस स्टोरी को उनकी एसीआर तथा पदोन्नति से जोड़ने की दिशा में काम करने का आग्रह किया। इससे कार्मिकों की योग्यता के अनुरूप जिम्मेदारी तय करने और सही व्यक्ति को सही पद पर तैनात करने में मदद मिलेगी।
सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मिशन कर्मयोगी लोक सेवा की कार्यसंस्कृति में परिवर्तन का राष्ट्रीय अभियान है। उत्तर प्रदेश के 19.26 लाख से अधिक सरकारी कार्मिक आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल पर पंजीकृत हैं और अब तक लगभग चार करोड़ प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे कर चुके हैं। प्रदेश के 334 से अधिक प्रशिक्षण संस्थान उन्नति पोर्टल से जुड़े हैं। हालांकि, प्रशिक्षण की वास्तविक सफलता इन आंकड़ों से आगे जाकर देखी जानी चाहिए। इसका आकलन इस आधार पर हो कि प्रशिक्षण के बाद निर्णय कितने बेहतर हुए, प्रक्रियाएं कितनी सरल हुईं और आम नागरिक को कितनी अच्छी सेवा मिली।
मुख्यमंत्री ने गोरखपुर में सड़क निर्माण का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने एक सड़क को दो लेन से चार लेन बनाने के निर्देश दिए थे, लेकिन अभियंताओं ने उसे जमीन से करीब तीन मीटर ऊंचा उठा दिया। इससे आसपास की घनी आबादी के लोगों का आवागमन बाधित हो गया। शिकायत मिलने पर वह स्वयं मौके पर पहुंचे और सड़क को मूल उद्देश्य के अनुरूप बनाने के निर्देश दिए। यह केवल सड़क निर्माण का मामला नहीं था, बल्कि कार्य की व्यावहारिक समझ और नागरिकों की जरूरतों को समझने की क्षमता का प्रश्न था। डिग्री और नियुक्ति पत्र प्राप्त कर लेना ही किसी व्यक्ति को योग्य अभियंता या सक्षम अधिकारी नहीं बना देता। नई तकनीक अपनाना, परिस्थितियों के अनुरूप निर्णय लेना और अपने दायित्वों को समझने की क्षमता विकसित करना आवश्यक है। इसी सोच के साथ क्षमता विकास की जरूरत महसूस हुई। क्षमता विकास आयोग की स्थापना और एस. राधा चौहान के अध्यक्ष बनने के बाद इस विषय पर उनकी बातचीत हुई थी। उपाम को आधुनिक तकनीक और क्षमता विकास के केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रयास इसी सोच का हिस्सा है।
सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने नीतिगत ठहराव से बाहर निकलकर विभिन्न क्षेत्रों में 36 सेक्टोरल पॉलिसीज तैयार की हैं। इस परिवर्तन में क्षमता विकास और मिशन कर्मयोगी की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्नति पोर्टल जैसे मंच प्रशिक्षण संस्थानों को अपने अनुभव, विशेषज्ञता और श्रेष्ठ कार्यपद्धतियां साझा करने का अवसर देते हैं। इससे एक संस्थान की सफलता दूसरे संस्थानों के लिए प्रेरणा बन सकती है और परस्पर सीखने की संस्कृति विकसित हो सकती है। मिशन कर्मयोगी केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि लोक सेवा की कार्यसंस्कृति में परिवर्तन का राष्ट्रीय अभियान है। विकसित भारत का निर्माण केवल बेहतर नीतियां बनाने से नहीं होगा, इसके लिए उन नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने वाला सक्षम, संवेदनशील और परिणामोन्मुखी प्रशासन भी चाहिए। जब नागरिक की परेशानी कम होगी, उसे समय पर समाधान मिलेगा और उसके चेहरे पर संतोष दिखाई देगा, तभी लोक सेवा का उद्देश्य सार्थक होगा।
