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‘विश्व बंधु’ के रूप में भारत वैश्विक दक्षिण देशों के साथ परमाणु विज्ञान में सहयोग बढ़ा रहा है: संगीता कुमारी सिंह देव

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संयुक्त राष्ट्र, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र में भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई कर रहीं संगीता कुमारी सिंह देव ने कहा है कि ‘विश्व बंधु’ यानी दुनिया के मित्र के रूप में भारत ग्लोबल साउथ के देशों के साथ अपना सहयोग और मजबूत कर रहा है, ताकि परमाणु विज्ञान के फायदे उन सभी देशों तक पहुंच सकें जिन्हें इसकी जरूरत है।

शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में संबोधन के दौरान बीजेपी सांसद सिंह देव ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ भारत का लंबे समय से चला आ रहा सहयोग इस वर्ष खास तौर पर रीजनल कोऑपरेटिव एग्रीमेंट (आरसीए) के जरिए और मजबूत हुआ है। यह समझौता परमाणु विज्ञान और प्रौद्योगिकी में अनुसंधान, विकास और प्रशिक्षण से जुड़ा है।

उन्होंने कहा, “आरसीए की अध्यक्षता भारत की इस मजबूत प्रतिबद्धता का प्रमाण है कि हम दक्षिण-दक्षिण सहयोग को बढ़ावा देना चाहते हैं और यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि परमाणु विज्ञान के लाभ हर उस देश तक पहुंचें जो इसका उपयोग करना चाहता है।”

भारत ने इस वर्ष मई में 22 सदस्य देशों वाले आरसीए की अध्यक्षता संभाली थी। उस समय भारत ने विज्ञान, नवाचार और साझा प्रगति के जरिए सदस्य देशों के बीच सहयोग को और मजबूत बनाने का संकल्प लिया था।

संगीता कुमारी सिंह देव ने कहा कि भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति का एक अच्छा उदाहरण मुंबई का टाटा मेमोरियल सेंटर (टीएमसी) है, जो बिम्सटेक (बिम्सटेक) सहयोग ढांचे के तहत कैंसर उपचार से जुड़े विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रहा है।

उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में बांग्लादेश, भूटान, नेपाल और म्यांमार के स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। टाटा मेमोरियल सेंटर भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत काम करता है। संगीता कुमारी सिंह देव ने कहा कि उन्नत परमाणु तकनीक वाले देश के रूप में भारत ने परमाणु ऊर्जा और शोध के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।

उन्होंने बताया कि अप्रैल में भारत दुनिया का केवल दूसरा देश बना, जिसने प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर को सफलतापूर्वक ‘क्रिटिकल’ अवस्था तक पहुंचाया। तमिलनाडु के कल्पक्कम में स्थित 500 मेगावाट क्षमता वाला यह रिएक्टर पूरी तरह भारत में डिजाइन और विकसित किया गया है। ‘क्रिटिकल’ होने का मतलब है कि रिएक्टर ने स्थिर और लगातार संचालन की क्षमता हासिल कर ली है।

संगीता कुमारी सिंह देव ने कहा कि जून में इस रिएक्टर ने दुनिया में पहली बार ऊष्मा (हीट) आधारित हाइड्रोजन उत्पादन का सफल प्रदर्शन भी किया। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) ने 55,190 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन किया। इस दौरान उसके संयंत्रों का औसत प्लांट लोड फैक्टर 80 प्रतिशत रहा और सुरक्षा के मामले में उसका रिकॉर्ड बेहतरीन रहा।

संगीता कुमारी सिंह देव ने कहा कि ये उपलब्धियां दिखाती हैं कि भारत न सिर्फ अपनी परमाणु क्षमताओं को मजबूत कर रहा है, बल्कि विकासशील देशों के साथ ज्ञान और तकनीक साझा कर वैश्विक सहयोग को भी आगे बढ़ा रहा है।