छतरपुर (मध्य प्रदेश), 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के सचिव एवं मध्य प्रदेश सह-प्रभारी रणविजय सिंह लोचव ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे पर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस देशभर में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान चला रही है और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के नाम पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर पारदर्शिता की मांग कर रही है।
छतरपुर में आईएएनएस से बातचीत के दौरान रणविजय सिंह लोचव ने आरोप लगाया कि एसआईआर के तहत करोड़ों मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, जिससे चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संस्था है, इसलिए उसके कामकाज से जुड़े सवालों का जवाब स्वयं आयोग को देना चाहिए।
रणविजय सिंह लोचव ने कहा कि विपक्ष लगातार चुनाव आयोग से मतदाता सूची को मशीन रीडेबल फॉर्मेट में उपलब्ध कराने की मांग कर रहा है, लेकिन आयोग इस पर स्पष्ट रुख नहीं अपना रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से जुड़े मामलों में पारदर्शिता का अभाव दिखाई दे रहा है।
कांग्रेस नेता ने यह भी दावा किया कि चुनाव आयोग के भीतर भी कई मुद्दों पर मतभेद सामने आए हैं। विपक्ष के सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा रहा है, जिससे संदेह और गहरा रहा है।
एक नवंबर को प्रस्तावित विपक्षी कार्यक्रम और आंदोलन को लेकर उन्होंने कहा कि देश में लोकतांत्रिक विरोध-प्रदर्शन के अधिकार पर लगातार प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं। उन्होंने जंतर-मंतर जैसे पारंपरिक प्रदर्शन स्थलों का उल्लेख करते हुए कहा कि विपक्ष सरकार की नीतियों के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाता रहेगा।
रणविजय सिंह लोचव ने भाजपा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जब भी चुनावी प्रक्रिया या अन्य मुद्दों पर सवाल उठते हैं, तब सरकार और भाजपा विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के बजाय ध्यान भटकाने की कोशिश करती है। उन्होंने दावा किया कि विभिन्न राज्यों में मतदाता सूची को लेकर कई तरह की शिकायतें सामने आई हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उन्होंने महाराष्ट्र और हरियाणा के चुनावों का भी जिक्र करते हुए मतदाता सूचियों में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। कांग्रेस नेता ने मांग की कि चुनाव आयोग सभी संबंधित आंकड़ों और प्रक्रियाओं को सार्वजनिक करे ताकि मतदाताओं के बीच किसी प्रकार का भ्रम न रहे।
