हैदराबाद, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी सोमवार को मुंबई में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात करेंगे। इस दौरान दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच तुम्मिडीहट्टी बैराज के निर्माण को लेकर चर्चा होगी। रेवंत रेड्डी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल रविवार शाम महाराष्ट्र के लिए रवाना होने वाला था। वहां रात में ठहरने के बाद प्रतिनिधिमंडल सोमवार सुबह 11 बजे सह्याद्री स्टेट गेस्ट हाउस में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से मुलाकात करेगा।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के अनुसार, इस बैठक में तुम्मिडीहट्टी परियोजना से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की जाएगी। बैठक में तेलंगाना के सिंचाई मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी और विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे।
तेलंगाना का प्रतिनिधिमंडल महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से गोदावरी नदी की सहायक नदी प्राणहिता पर 152 मीटर की ऊंचाई पर तुम्मिडीहट्टी बैराज के निर्माण की मंजूरी देने का आग्रह करेगा। तेलंगाना सरकार महाराष्ट्र को पहले से सहमत 148 मीटर के बजाय 152 मीटर के पूर्ण जलाशय स्तर (एफआरएल) पर बैराज बनाने के लिए राजी करने की कोशिश करेगी।
लंबे समय से लंबित इस परियोजना से उत्तरी तेलंगाना में सिंचाई और पेयजल की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है। तेलंगाना सरकार का मानना है कि बैराज की ऊंचाई 152 मीटर करने से प्राणहिता नदी से अधिक मात्रा में पानी का उपयोग किया जा सकेगा। इससे अविभाजित आदिलाबाद जिले और उत्तरी तेलंगाना के अन्य क्षेत्रों में सिंचाई सुविधाओं में सुधार होगा।
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने 23 अक्टूबर को अधिकारियों के साथ हुई बैठक में महाराष्ट्र के साथ तुम्मिडीहट्टी बैराज को लेकर होने वाली चर्चा की तैयारी करने का निर्देश दिया था। उन्होंने अधिकारियों से कहा था कि वे तकनीकी तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर महाराष्ट्र को परियोजना के लिए राजी करने की तैयारी करें। रेवंत रेड्डी ने बताया था कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मुद्दे पर बातचीत करने की इच्छा जताई है।
बैठक के दौरान सिंचाई विभाग के इंजीनियरों ने मुख्यमंत्री को तुम्मिडीहट्टी बैराज के 152 मीटर और 150 मीटर एफआरएल के आधार पर येल्लमपल्ली परियोजना तक पानी पहुंचाने या उठाने की संभावित मात्रा की जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि बैराज के निर्माण से महाराष्ट्र में किसी गांव के डूबने की आशंका नहीं है। हालांकि, 152 मीटर एफआरएल होने पर महाराष्ट्र में लगभग 2,300 एकड़ भूमि जलमग्न हो सकती है, जबकि 150 मीटर एफआरएल पर यह क्षेत्र 1,000 एकड़ से कम रहने का अनुमान है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को महाराष्ट्र में संभावित जलमग्न क्षेत्र का आकलन करने का निर्देश दिया, ताकि राज्य सरकार को तेलंगाना द्वारा अधिकतम संभव मात्रा में पानी के उपयोग की अनुमति देने के लिए राजी किया जा सके। उन्होंने अधिकारियों से पिछले महीने नई दिल्ली में दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच हुई बैठक के बाद केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) की ओर से मांगी गई सभी आवश्यक जानकारियां साझा करने को भी कहा।
रेवंत रेड्डी ने कहा कि इस बैराज की योजना आदिलाबाद जिले में दो लाख एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई के उद्देश्य से बनाई जा रही है। यह जिला राज्य के सबसे पिछड़े क्षेत्रों में शामिल है और यहां बड़ी आबादी वन एवं आदिवासी क्षेत्रों में रहती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि ‘जल, जंगल, जमीन’ के नारे के साथ संघर्ष करने वाले लोगों को भी इस परियोजना से लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र पहले 148 मीटर एफआरएल पर सहमत हुआ था, लेकिन इतनी कम ऊंचाई पर बैराज बनाने से तेलंगाना को अपेक्षित मात्रा में पानी उपलब्ध नहीं हो पाएगा। उन्होंने अधिकारियों को सभी तकनीकी रिपोर्ट, पानी की उपलब्धता और संभावित जलमग्न क्षेत्र से संबंधित आंकड़ों के साथ तैयार रहने का निर्देश दिया, ताकि महाराष्ट्र को 152 मीटर एफआरएल पर बैराज निर्माण की अनुमति देने के लिए मनाया जा सके।
