लखनऊ, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से बिहार की राजधानी पटना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता को लेकर की गई टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
उन्होंने इसे कांग्रेस की राजनीतिक हताशा और नैतिक दिवालियेपन का प्रमाण बताते हुए कहा कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन किसी के दिवंगत पिता को निशाना बनाना भारतीय संस्कृति, सामाजिक मर्यादा और मानवीय संवेदनाओं का अपमान है।
उन्होंने खड़गे से इस टिप्पणी के लिए देश की जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। पंकज चौधरी ने कहा कि कांग्रेस की राजनीति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति व्यक्तिगत विद्वेष बार-बार सार्वजनिक रूप से दिखाई देता है। कभी उनकी माता के प्रति अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया जाता है तो कभी उनके दिवंगत पिता को लेकर अमर्यादित टिप्पणियां की जाती हैं। यह केवल किसी व्यक्ति या परिवार का अपमान नहीं है, बल्कि भारतीय समाज की उन परंपराओं पर प्रहार है, जिनमें माता-पिता के सम्मान और दिवंगत व्यक्तियों के प्रति आदर को सर्वोच्च स्थान दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की नीतियों, निर्णयों और कार्यशैली पर सवाल उठाना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन राजनीतिक असहमति को व्यक्तिगत घृणा में बदल देना किसी भी जिम्मेदार राजनीतिक दल को शोभा नहीं देता। आजकल नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की भाषा भी देश के निर्वाचित प्रधानमंत्री और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति अशोभनीय है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस को समझना चाहिए कि जनता राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अधिक नेताओं के आचरण, विचारों और जनसेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को महत्व देती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना जीवन राष्ट्रसेवा, गरीब कल्याण और भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प के लिए समर्पित किया है। उनके नेतृत्व में देश आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। ऐसे में व्यक्तिगत टिप्पणियों के जरिए राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कांग्रेस की हताशा को ही उजागर करती है।
चौधरी ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष को अपनी टिप्पणी के लिए देश की जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। राजनीति में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन भाषा की मर्यादा, परिवार का सम्मान और मानवीय संवेदनाएं हर परिस्थिति में कायम रहनी चाहिए।
उन्होंने कांग्रेस को आत्ममंथन करने की सलाह देते हुए कहा कि उसे तय करना होगा कि वह जनहित के मुद्दों पर सकारात्मक विपक्ष की भूमिका निभाना चाहती है या व्यक्तिगत आक्षेपों के सहारे अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखना चाहती है।
देश की जनता लोकतांत्रिक तरीके से हर राजनीतिक दल के आचरण का मूल्यांकन करती है। व्यक्तिगत अपमान की राजनीति से न तो जनविश्वास अर्जित किया जा सकता है और न ही जनता का समर्थन हासिल किया जा सकता है।
