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उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन 26 और 27 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश दौरे पर रहेंगे, तिरुपति में करेंगे दर्शन

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नई दिल्ली, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन 26 और 27 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह तिरुपति में दर्शन करेंगे और एक विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे।

आधिकारिक बयान के अनुसार, 26 अक्टूबर को उपराष्ट्रपति विजयवाड़ा में डॉ. एनटीआर यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के 40वें (रूबी जुबली) स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

अपने दौरे पर वह तिरुपति स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर और तिरुचनूर स्थित श्री पद्मावती अम्मावारी मंदिर में पूजा-अर्चना भी करेंगे।

इससे पहले राधाकृष्णन ने दिल्ली में ‘सहकारी संघवाद और कानून सुधार: राष्ट्रीय एवं राज्यीय दृष्टिकोण’ विषय पर आयोजित एक सम्मेलन का उद्घाटन किया था। इस दौरान उन्होंने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत के कानूनी ढांचे को आधुनिक बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने ‘टीम इंडिया’ की भावना को रेखांकित करते हुए कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच अधिक संवाद, समन्वय और साझा जिम्मेदारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद कभी भी जनहित के बड़े उद्देश्यों के आड़े नहीं आने चाहिए।

उन्होंने सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद के महत्व पर बल देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘टीम इंडिया’ की परिकल्पना केंद्र और राज्यों के बीच परामर्श, समन्वय और साझा जिम्मेदारी पर आधारित है।

राधाकृष्णन ने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को पूरा करने के लिए कानूनी सुधार बेहद जरूरी हैं। उनके अनुसार, विकास को मजबूत कानूनों, पारदर्शी संस्थाओं, प्रभावी प्रशासन और सभी के लिए न्याय का समर्थन मिलना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में औपनिवेशिक काल के तीन आपराधिक कानूनों को बदलना और 1,700 से अधिक अप्रासंगिक कानूनों को समाप्त करना भारत की कानूनी व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

उन्होंने राज्य विधि आयोगों से पुराने और अप्रासंगिक कानूनों की पहचान कर उन्हें संशोधित या समाप्त करने की सिफारिश करने का आग्रह किया, ताकि लोगों का जीवन आसान हो और सुशासन को बढ़ावा मिले।

उन्होंने कहा कि कानून सुधारों में सहकारी संघवाद का अर्थ हर मामले में एकरूपता नहीं है। जहां केंद्र और राज्यों की संवैधानिक जिम्मेदारियां मिलती हैं, वहां दोनों को मिलकर काम करना चाहिए। साथ ही राज्यों की विशेष जरूरतों को पूरा करने के उनके अधिकारों का भी सम्मान होना चाहिए।

राधाकृष्णन ने भारतीय विधि आयोग, राज्य विधि आयोगों और राज्य कानून विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताते हुए अंतरराज्यीय विचार-विमर्श, सर्वोत्तम प्रक्रियाओं के आदान-प्रदान और पुराने कानूनों की नियमित समीक्षा पर जोर दिया।