सैंटियागो, 27 अक्टूबर (आईएएनएस)। चिली के पेनालोलेन स्थित बहाई मंदिर (हाउस ऑफ वर्शिप) की 10वीं वर्षगांठ के अवसर परआध्यात्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिनमें प्रार्थना सभाएं और सामूहिक गायन (कोरल परफॉरमेंस) शामिल थे।
चिली में भारत की राजदूत अभिलाषा जोशी भी समारोह का हिस्सा बनीं। इस दौरान शांति, समावेशिता और साझा मानवता को बढ़ावा देने में इस मंदिर की अहम भूमिका पर प्रकाश डाला गया।
चिली में भारतीय दूतावास ने मंगलवार को ‘एक्स’ पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी। बताया, “भारत की राजदूत अभिलाषा जोशी ने सैंटियागो के पेनालोलेन स्थित बहाई मंदिर (हाउस ऑफ वर्शिप) की 10वीं वर्षगांठ समारोह में भाग लिया। एंडीज पर्वत की तलहटी में बसा यह शानदार वास्तुशिल्प स्थल और भी अधिक चमकता हुआ प्रतीत हो रहा था, क्योंकि इसने प्रार्थना, चिंतन और सामुदायिक एकता के लिए एक खुले आश्रय स्थल के रूप में अपनी सेवा के पूरे 10 साल पूरे कर लिए हैं।”
दूतावास ने आगे कहा, “आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के एक बेहतरीन मिश्रण के साथ इस उपलब्धि का जश्न मनाया गया। इसमें शांत भक्ति कार्यक्रम, प्रेरणादायक गायन प्रस्तुतियां, स्थानीय युवा ऑर्केस्ट्रा के साथ सामुदायिक सभाएं और मंदिर के वास्तुकार सियामक हरीरी के विचार शामिल थे। कांच और संगमरमर से बनी इस प्रतिष्ठित इमारत का जश्न मनाने के अलावा, इस वर्षगांठ ने एक ऐसी जगह के रूप में मंदिर की निरंतर भूमिका को रेखांकित किया, जो सभी लोगों के लिए है और जो सामूहिक शांति, समावेशिता और साझा मानवता की गहरी भावना को बढ़ावा देती है।”
यह मंदिर दक्षिण अमेरिका का बहाई उपासना मंदिर है, जिसका उद्घाटन अक्टूबर 2016 में हुआ था। यह दुनिया के 8 महाद्वीपीय बहाई मंदिरों में से आखिरी है। कनाडाई वास्तुकार सियामक हरिरी ने इसे डिजाइन किया था। ये बहाई मंदिर नौ मुड़े हुए पंखुड़ीनुमा गुंबद जैसा दिखता है।
बहाई धर्म 19वीं शताब्दी में ईरान (फारस) में स्थापित एक स्वतंत्र, एकेश्वरवादी विश्व धर्म है। इसकी आधिकारिक वेबसाइट ‘बहाई धर्म’ के अनुसार, इस धर्म की नींव बहाउल्लाह ने रखी थी।
