भोपाल, 27 अक्टूबर (आईएएनएस)। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग की ओर से एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) और फॉर्म-6 को लेकर दाखिल किए गए हलफनामे का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से 5 अक्टूबर को संबंधित फैसलों और उनकी प्रक्रिया से जुड़े सभी तथ्य मांगे थे। ऐसे में आयोग की ओर से हलफनामा दाखिल करना अच्छी बात है और इसका स्वागत किया जाना चाहिए।
आईएएनएस से बातचीत में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने कहा कि फॉर्म-6 को लेकर लोगों के सामने कई तरह की परेशानियां थीं। चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में इस संबंध में स्थिति स्पष्ट की है और बताया है कि प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि कानून के मुताबिक आयोग अपने फैसले सर्वसम्मति या बहुमत के आधार पर ले सकता है।
उन्होंने कहा कि हलफनामे से यह बात स्पष्ट होती है कि एसआईआर को लेकर लिए गए फैसले सर्वसम्मति से किए गए थे, हालांकि इस पूरे मामले में कुछ अन्य विवाद भी सामने आए हैं। इस संबंध में 14 आपत्तियां दर्ज होने की बात भी सामने आई है।
पूर्व चुनाव आयुक्त ने एक निजी अखबार में 23 सितंबर को प्रकाशित खबरों का जिक्र करते हुए कहा कि उसमें चुनाव आयोग के दो आयुक्तों की ओर से कई आपत्तियां दर्ज कराने और कैबिनेट सचिव को पत्र लिखने जैसी बातें कही गई थीं। साथ ही, करीब 10 महीने तक बैठक नहीं होने का भी दावा किया गया था। उन्होंने कहा कि जब तक हलफनामे का पूरा विवरण सामने नहीं आता, तब तक इस मामले में कुछ कहा नहीं जा सकता है।
ओपी रावत ने चुनाव आयोग के कर्मचारियों और बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) से जुड़े एक अन्य मामले पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आमतौर पर बीएलओ या चुनाव आयोग के कर्मचारी किसी भी तरह की गड़बड़ी की जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को देते हैं, लेकिन अब कुछ मामलों में कर्मचारी सीधे पुलिस में शिकायत दर्ज करा रहे हैं।
उन्होंने अखबारों में प्रकाशित खबरों का हवाला देते हुए बताया कि ओडिशा के धामपुर में 10 बीएलओ ने एफआईआर दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि उनके ही अधिकारियों ने उनके पहचान पत्रों और ओटीपी का इस्तेमाल करके कई मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए हैं।
रावत ने कहा कि यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। इससे पता चलता है कि बीएलओ के बीच भी यह भरोसा कम हो रहा है कि उनकी शिकायतों को विभाग के भीतर गंभीरता से सुना जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि इस तरह की घटनाएं एक-दो जगह से भी सामने आ रही हैं तो चुनाव आयोग को सतर्क होने और मामले की गंभीरता से जांच करने की जरूरत है। चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और कर्मचारियों का संस्थागत व्यवस्था पर भरोसा बनाए रखना बेहद जरूरी है।
