नई दिल्ली, 27 अक्टूबर (आईएएनएस)। दिल्ली के व्यापारियों और मिठाई की दुकानों के मालिकों ने मंगलवार को कांग्रेस पार्टी और इंडी गठबंधन के अन्य नेताओं से आग्रह किया कि वे 1 नवंबर को होने वाली अपनी रैली को दीपावली के बाद के लिए टाल दें। उन्होंने चिंता जताई कि इस आयोजन से त्योहारों के अहम सीजन के दौरान कारोबार पर बुरा असर पड़ सकता है।
व्यापारियों ने बताया कि पिछले चार महीनों में यह पांचवीं ऐसी रैली होगी। बार-बार होने वाले इन प्रदर्शनों से व्यावसायिक गतिविधियों पर बुरा असर पड़ा है और व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
बंगाली मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मुकेश गुप्ता ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि इन लगातार रैलियों ने दुकानदारों और व्यापारियों के कारोबार को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे कई लोगों के लिए अपने परिवारों का भरण-पोषण करना मुश्किल हो गया है।
उन्होंने कहा कि 1 नवंबर को होने वाली रैली कोई पहली घटना नहीं है। पिछले चार महीनों में यह पांचवीं रैली है। इसने दुकानदारों और व्यापारियों के कारोबार को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। कारोबारी अपने परिवार, पत्नी और बच्चों का खर्च उठाने में भी असमर्थ हो गए हैं। बाजार में न के बराबर खरीदारी या व्यापारिक गतिविधियां हो रही हैं। अक्सर दुकानें बंद रखनी पड़ती हैं और तोड़फोड़ का डर भी बना रहता है। आखिर ये रैलियां क्यों और किस मकसद से आयोजित की जा रही हैं? मुझे समझ नहीं आता कि ये लोग ऐसा क्यों करते हैं।
मुकेश गुप्ता ने राजनीतिक नेताओं से अपील की कि वे रैलियां आयोजित करने के बजाय, जिनसे आम जनता को परेशानी होती है और कारोबार पर असर पड़ता है। बातचीत के जरिए अपने मतभेदों को सुलझाएं।
उन्होंने कहा कि उन्हें एक साथ बैठकर अपने मुद्दों का समाधान निकालना चाहिए। बेहतर तो यही होगा कि कोई रैली न हो। अगर रैली करनी ही है तो ऐसी जगह पर की जानी चाहिए, जहां किसी को कोई परेशानी न हो। हमने उनसे यह रैली न करने का आग्रह किया है और व्यापारी व अन्य लोग भी यही मांग कर रहे हैं। यहां तक कि सरकार से जुड़े लोग भी कह रहे हैं कि यह रैली नहीं होनी चाहिए।
मुकेश गुप्ता ने बताया कि व्यापारियों ने कांग्रेस नेताओं, जिनमें पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी शामिल हैं, उनसे कई बार अपील की है कि वे रैली की तारीख पर पुनर्विचार करें।
उन्होंने कहा कि हमने पुरजोर आग्रह किया है और सभी ने उनसे इस पर फिर से विचार करने को कहा है। खड़गे और राहुल गांधी को इस बारे में सोचना चाहिए। अगर वे दीपावली के बाद रैली करते हैं तो किसी को कोई नुकसान नहीं होगा और न ही किसी को परेशानी उठानी पड़ेगी।
‘बंगाली स्वीट हाउस एंड पेस्ट्री शॉप’ के मालिक वर्जेश अग्रवाल ने भी त्योहारों के इस मौसम में रैली के कारण कारोबार पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस रैली की घोषणा को देखते हुए लगता है कि सभी व्यापारियों को काफी नुकसान उठाना पड़ेगा, क्योंकि दीपावली एक प्रमुख त्योहार है और हर कोई, चाहे वह छोटा व्यापारी हो या बड़ा, इसका बेसब्री से इंतजार करता है। इस एक दिन की रैली के कई दूरगामी असर भी होंगे। मुझे लगता है कि दो-तीन दिनों तक व्यापारिक गतिविधियां काफी धीमी रहेंगी। ट्रैफिक जाम होगा और रैली के लिए बाहर से भी काफी लोग आएंगे।
अग्रवाल ने माना कि नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि रैली का समय व्यापारियों और आम जनता के लिए मुश्किलें पैदा कर सकता है। हर नागरिक को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी राय रखने का लोकतांत्रिक अधिकार है और हम इसका पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन त्योहार के इतने करीब रैली करने से निश्चित रूप से व्यापार पर असर पड़ेगा। व्यापारियों और कारोबारियों के तौर पर, हम बस एक विनम्र अनुरोध कर सकते हैं। अगर वे रैली को दीपावली के बाद के लिए पुनर्निर्धारित कर सकें, तो बेहतर होगा। इससे उनका लोकतांत्रिक अधिकार भी सुरक्षित रहेगा, जनता को भी कोई परेशानी नहीं होगी और व्यापार भी बिना किसी रुकावट के चलता रहेगा।
इस बीच, खान मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव मेहरा ने कहा कि व्यापारियों की बार-बार की अपीलों के बावजूद कांग्रेस नेतृत्व अपने फैसलों पर पुनर्विचार करने के लिए तैयार नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि हमारे पत्रों का कांग्रेस पार्टी या राहुल गांधी पर कोई असर नहीं पड़ रहा है और मुझे समझ नहीं आ रहा कि उनका मकसद क्या है। हमने उनसे अपील की थी कि त्योहारों के मौसम में विरोध प्रदर्शन न करें, क्योंकि इससे व्यापारियों को भारी नुकसान होता है। ऐसा लगता है कि वे अर्थव्यवस्था को उसी हालत में बनाए रखने पर तुले हैं, जिसे उन्होंने कभी ‘मृत’ कहा था। अगर हम व्यापार के सबसे अहम सीजन में कमाई नहीं कर पाएंगे तो हमारे कर्मचारियों और उनके परिवारों को नुकसान उठाना पड़ेगा। तब जाकर शायद उनका यह मकसद पूरा हो जाएगा कि वे दावा कर सकें कि बेरोजगारी बढ़ गई है।
मेहरा ने कहा कि विरोध प्रदर्शनों और रैलियों का आर्थिक बोझ लगातार व्यापारियों को ही उठाना पड़ रहा है। मेरा सवाल हर राजनीतिक दल से है। क्या सिर्फ हम व्यापारियों को ही हमेशा नुकसान उठाना पड़ेगा? हर बार मार हमें ही झेलनी पड़ती है। हमारी अपील खारिज कर दी गई है।
मेहरा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने संवैधानिक और राजनीतिक नेताओं के इस्तीफे की मांग करने का एक चलन बना लिया है। उन्होंने कहा कि व्यापारी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि ऐसी घटनाओं का उनकी आजीविका पर क्या असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि त्योहारी सीजन कारोबार के लिए बहुत अहम होता है और राजनीतिक दलों से अपील की कि वे अपने फैसलों के आर्थिक नतीजों पर भी विचार करें।
