SGSU Advertisement
Home कानून जो गैर-हिंदू व्यक्ति देवी-देवताओं के प्रति सम्मान नहीं रखते, उन्हें मंदिर में...

जो गैर-हिंदू व्यक्ति देवी-देवताओं के प्रति सम्मान नहीं रखते, उन्हें मंदिर में प्रवेश की इजाजत नहीं : मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच

0
5

चेन्नई, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। मदुरै बेंच की जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और जस्टिस मुरुगन की डिवीजन बेंच ने फैसला सुनाया है कि जो व्यक्ति सार्वजनिक रूप से अन्य धर्मों के धार्मिक प्रतीकों का प्रदर्शन करते हैं और हिंदू देवी-देवताओं के प्रति अपनी आस्था या सम्मान व्यक्त नहीं करते, उन्हें हिंदू मंदिर परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

जजों ने कहा, “क्या यह कहा जा सकता है कि कुछ लोगों के गर्भगृह में प्रवेश करने से अपवित्रता होती है? आगम इस मुद्दे को स्पष्ट रूप से संबोधित करते हैं। हिंदुओं के कुछ वर्गों को भी मंदिर के ध्वजस्तंभ को पार करने की अनुमति नहीं थी। ऐसे आगमिक निर्देशों को आज स्वीकार नहीं किया जा सकता। संविधान सर्वोच्च है। ये आगमिक निर्देश उन गैर-हिंदुओं पर लागू होते हैं, जिन्होंने अंडरटेकिंग पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।”

दरअसल, हिंदू मुन्नानी के मदुरै जिला समन्वयक थंगम वेंकटेश ने मदुरै बेंच के सामने एक जनहित याचिका दायर की थी। उन्होंने मांग की थी कि गैर-हिंदुओं को हिंदू मंदिरों के प्रतिबंधित गर्भगृहों और मंडपों में प्रवेश करने से रोका जाए, तमिलनाडु मंदिर प्रवेश प्राधिकरण अधिनियम और हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम के प्रावधानों को सख्ती से लागू किया जाए, मंदिरों में प्रमुख स्थानों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने वाले नोटिस बोर्ड लगाए जाएं और उन अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक और विभागीय कार्रवाई शुरू की जाए, जो खुले तौर पर दूसरे धर्मों के धार्मिक प्रतीकों का प्रदर्शन करने वाले लोगों को मंदिर परिसर में प्रवेश की अनुमति देते हैं।

याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और जस्टिस मुरुगन की बेंच ने कहा कि इसी अदालत ने पहले ही आगमिक मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर स्पष्ट फैसला दे दिया है। लेकिन हाल ही में मंदिरों में हुई कुछ घटनाओं के मद्देनजर याचिकाकर्ता ने इस मुद्दे पर स्पष्ट फैसला मांगा था। राज्य ने कहा कि मंदिर प्रवेश को नियंत्रित करने वाले संबंधित कानूनों और नियमों के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है और आगे भी किया जाएगा।

तमिलनाडु मंदिर प्रवेश प्राधिकरण अधिनियम कहता है कि मंदिर चाहे किसी भी नाम से जाना जाए, वह हिंदुओं या हिंदू समुदाय के वर्गों के लिए एक सार्वजनिक पूजा स्थल है।