भोपाल, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य निगरानी पोर्टल पर पंजीकृत 62 लाख गर्भवती महिलाओं में से लगभग 2 लाख महिलाओं को उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं के रूप में पहचाना गया है। लेकिन इनमें से केवल 30 प्रतिशत महिलाओं को ही समय से पहले स्वास्थ्य संस्थानों में भर्ती कराया जा रहा है।
यह मुद्दा उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला की अध्यक्षता में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यक्रमों की समीक्षा बैठक के दौरान उठा, जिसमें उन्होंने अधिकारियों को उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की समय पर पहचान, निगरानी और उपचार सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
सरकार द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि अनमोल पोर्टल पर लगभग 62 लाख गर्भवती महिलाओं को पंजीकृत किया गया है, जिनमें से लगभग 2 लाख को उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं के रूप में पहचाना गया है। उनकी निगरानी सुमन एकीकृत कमांड सेंटर के माध्यम से भी की जाती है।
बैठक के दौरान, स्वास्थ्य मंत्री भी रहे शुक्ला ने अधिकारियों को गर्भवती महिलाओं के समय पर पंजीकरण और निर्धारित प्रसवपूर्व जांच पूरी करने को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत स्क्रीनिंग पर भी जोर दिया और नियमित चिकित्सा जांच और संस्थागत प्रसव के बारे में अधिक जागरूकता लाने का आह्वान किया।
मंत्री ने कहा कि अधिकारियों और जमीनी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से परिभाषित की जानी चाहिए और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की नियमित निगरानी की जानी चाहिए।
2022-24 के नमूना पंजीकरण प्रणाली आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में मातृ मृत्यु दर प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर 135 मृत्यु दर्ज की गई। चालू वित्त वर्ष में सितंबर तक राज्य में गर्भवती महिलाओं का प्रथम-त्रैमासिक पंजीकरण 90.6 प्रतिशत और संस्थागत प्रसव 93.4 प्रतिशत रहा। राज्य में गर्भवती महिलाओं की देखभाल के लिए 35 प्रसूति गहन देखभाल इकाइयां, 109 प्राथमिक रेफरल इकाइयां और 229 प्रसव प्रतीक्षा गृह हैं।
शुक्ला ने अधिकारियों को टेलीमेडिसिन सेवा ई-संजीवनी के माध्यम से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में विशेषज्ञ परामर्श की पहुंच में सुधार करने का भी निर्देश दिया। उन्होंने सेवा उपलब्धता में कमियों को दूर करने, आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और सुविधा के उपयोग की नियमित समीक्षा करने का आह्वान किया।
अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच, ई-संजीवनी के माध्यम से राज्य में 59,914 सामान्य टेली-परामर्श और 10,890 विशेषज्ञ परामर्श की सुविधा प्रदान की गई।
उपमुख्यमंत्री ने नवजात शिशुओं और गंभीर रूप से बीमार बच्चों के लिए उपचार सुविधाओं को मजबूत करने और कुपोषण, एनीमिया, दस्त और निमोनिया से निपटने के कार्यक्रमों में सुधार करने का भी आह्वान किया।
