नई दिल्ली/बेंगलुरु, 29 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने क्रिप्टो करेंसी और विशेष रूप से स्टेबलकॉइन्स के माध्यम से कथित तौर पर किए जा रहे अवैध सीमा-पार (क्रॉस-बॉर्डर) धन हस्तांतरण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए बेंगलुरु और मध्य प्रदेश में कई परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया है। जांच के दौरान विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा), 1999 के बड़े पैमाने पर उल्लंघन और हजारों करोड़ रुपये के अनाधिकृत विदेशी वित्तीय लेनदेन के संकेत मिले हैं।
ईडी के अनुसार, जांच की शुरुआत बेंगलुरु स्थित आरपीएफएएस टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ प्राप्त शिकायतों के आधार पर की गई। कंपनी कथित तौर पर दो प्लेटफॉर्म संचालित करती है। जांच एजेंसी का आरोप है कि ये प्लेटफॉर्म क्रिप्टोकरेंसी खासकर स्टेबलकॉइन्स का उपयोग कर अधिकृत बैंकिंग चैनलों को दरकिनार करते हुए अंतरराष्ट्रीय धन हस्तांतरण की सुविधा प्रदान कर रहे थे। ईडी का कहना है कि कंपनी बिना आरबीआई की अनुमति के क्रिप्टो आधारित त्वरित अंतरराष्ट्रीय भुगतान सेवाओं का प्रचार कर रही थी।
प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार उपयोगकर्ता पहले प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण करते थे। धनराशि कंपनी के बैंक खाते में जमा कराई जाती थी। जमा धन से यूएसडीटी जैसे स्टेबल कॉइन्स खरीदे जाते थे। इन क्रिप्टो संपत्तियों को भारतीय एक्सचेंजों पर बेचकर प्राप्त राशि लाभार्थी तक पहुंचाई जाती थी। इस पूरी प्रक्रिया में अधिकृत विदेशी प्रेषण चैनलों का उपयोग नहीं किया जाता था।
ईडी का दावा है कि कंपनी “ऑन-रैम्प” और “ऑफ-रैम्प” सेवाओं के जरिए फिएट मुद्रा को क्रिप्टो में और फिर क्रिप्टो को नकदी में बदलने की सुविधा दे रही थी, जिससे सीमा-पार धन हस्तांतरण आसान हो जाता था।
तलाशी के दौरान एजेंसी को ऐसे साक्ष्य मिले हैं जिनसे संकेत मिलता है कि कनाडा, लिथुआनिया, अमेरिका और अन्य देशों में स्थापित कई शेल कंपनियों का उपयोग किया जा रहा था। ईडी के अनुसार, विदेशी क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर बड़ी मात्रा में क्रिप्टो संपत्ति रखी गई थी।
जांच एजेंसी का कहना है कि प्रारंभिक जांच में फेमा के तहत 4600 करोड़ रुपए से अधिक के संभावित उल्लंघन सामने आए हैं। इसमें विदेशी प्लेटफॉर्म पर रखी गई क्रिप्टो संपत्तियां और अनधिकृत सीमा-पार लेन-देन शामिल हैं। ईडी ने लोकप्रिय विकेंद्रीकृत वित्त प्लेटफॉर्म इंस्टाडप्प (जो अब बड़े स्तर पर फ्लूइड नाम से संचालित होता है) से जुड़े परिसरों पर भी तलाशी ली है।
इंस्टाडप्प एक ब्लॉकचेन आधारित विकेंद्रीकृत वित्त प्लेटफॉर्म है, जहां उपयोगकर्ता क्रिप्टो टोकन उधार दे सकते हैं, क्रिप्टो के बदले ऋण ले सकते हैं, विभिन्न क्रिप्टो संपत्तियों की अदला-बदली कर सकते हैं। उपलब्ध ओपन-सोर्स आंकड़ों के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म पर एक अरब डॉलर से अधिक मूल्य की क्रिप्टो संपत्तियां लॉक हैं और अब तक लगभग 149 मिलियन डॉलर की फीस अर्जित की जा चुकी है।
ईडी का दावा है कि इंस्टाडप्प स्वयं को अमेरिकी कंपनी के रूप में प्रस्तुत करता है, लेकिन जांच में सामने आया कि इसका संचालन और विकास कार्य भारत से किया जा रहा था।
एजेंसी के अनुसार, संस्थापक सौमय जैन और उनकी टीम भारत से प्लेटफॉर्म का प्रबंधन कर रही थी जबकि अमेरिका, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स, सिंगापुर और दुबई में कई कंपनियां स्थापित की गई थीं। जांच में इन संस्थाओं को “पेपर” या “शेल” कंपनियां बताया गया है, जिनके पास न तो पर्याप्त कर्मचारी थे और न ही वास्तविक परिचालन ढांचा।
ईडी के मुताबिक, प्लेटफॉर्म की आय और निवेशकों से प्राप्त फंड पहले बीवीआई स्थित कंपनियों के मल्टी-सिग्नेचर वॉलेट्स में स्टेबलकॉइन के रूप में जमा होते थे। बाद में इन्हें सिंगापुर स्थित ट्रेडिंग प्लेटफॉर्मों पर बेचकर नकद राशि सिंगापुर की संबद्ध कंपनियों के खातों में भेजी जाती थी। वहां से धन भारत में सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और कंसल्टेंसी शुल्क के नाम पर भेजा जाता था।
जांच में यह भी सामने आया कि सिंगापुर के प्रीपेड बैंक कार्ड भारत में खर्चों के भुगतान के लिए इस्तेमाल किए जा रहे थे। कुछ धनराशि दुबई स्थित बैंक खातों में भी ट्रांसफर की गई। प्रारंभिक जांच में ईडी ने लगभग 40 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 330 करोड़ से अधिक) के फेमा उल्लंघन की आशंका जताई है। एजेंसी ने कहा है कि मामले की आगे की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और खुलासे हो सकते हैं।

