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सीनियर महिला टी20 ट्रॉफी में खेली रिकॉर्ड तोड़ पारी, तनीषा बोलीं- मैंने सिर्फ गेंदें देखीं और हर तरफ शॉट खेला

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नई दिल्ली, 29 अक्टूबर (आईएएनएस)। पुणे के एमसीए ग्राउंड 2 में सीनियर महिला टी20 ट्रॉफी के मुकाबले में जब तनीषा सिंह हैदराबाद के खिलाफ दिल्ली की ओर से ओपनिंग करने उतरीं, तो उन्हें कुछ ऐसा महसूस हुआ जिसे वे तुरंत समझा नहीं पा रही थीं। इस दाएं हाथ की बल्लेबाज को अंदर से लग रहा था कि गुरुवार का दिन उन्हीं का होने वाला है।

यह एहसास तब सच साबित हुआ जब तनीषा ने 47 गेंदों पर 119 रन बनाए। उन्होंने सिर्फ 38 गेंदों में अपना शतक पूरा किया और दिल्ली को 262/6 के स्कोर तक पहुंचाया। यह घरेलू टी20 क्रिकेट में किसी महिला टीम द्वारा बनाया गया अब तक का सबसे बड़ा स्कोर है।

तनीषा का 38 गेंदों में लगाया गया शतक, महिला टी20 क्रिकेट में संयुक्त रूप से तीसरा सबसे तेज शतक है। उनसे तेज शतक केवल किरण नवगिरे (पंजाब के खिलाफ महाराष्ट्र के लिए 34 गेंदों में शतक) और सोफी डिवाइन (ओटागो के खिलाफ वेलिंगटन के लिए 36 गेंदों में शतक) ने ही बनाए हैं।

तनीषा अब वेस्टइंडीज की बल्लेबाज डिएंड्रा डॉटिन के साथ इस रिकॉर्ड को साझा करती हैं, जिन्होंने 2010 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 38 गेंदों में शतक जड़ा था। मैच खत्म होने के बाद पुणे से आईएएनएस के साथ एक खास बातचीत में तनीषा ने कहा, “आज मैंने बस यही सोचा था कि मुझे अच्छे इरादे के साथ बल्लेबाजी करनी है, आक्रामक खेलना है और दबदबा बनाए रखना है। मुझे लग रहा था कि मैं अच्छा स्कोर करूंगी, क्योंकि मुझे ऐसा ही महसूस हो रहा था। मैं बस गेंद को देख रही थी और हर तरफ शॉट लगा रही थी।”

पारी की पहली दो गेंदों से ही उनका इरादा साफ था। उन्होंने एस. यशश्री की इन दोनों गेंदों पर चौके जड़े और उनका यह आक्रामक रुख अंत तक बना रहा। दूसरे ओवर में दिल्ली ने वंशिका लीला का विकेट गंवा दिया, लेकिन इससे तनीषा की रफ्तार पर कोई असर नहीं पड़ा। दूसरे छोर पर मौजूद भारतीय बल्लेबाज प्रिया पुनिया के साथ मिलकर उन्होंने दूसरे विकेट के लिए सिर्फ 66 गेंदों में 160 रन जोड़े।

तनीषा ने कहा, “सच कहूं तो, मुझे नहीं लगा था कि मैं इतने रन बना सकूंगी। मैं गेंद पर जितना हो सके आक्रामक तरीके से प्रहार करने की कोशिश कर रही थी, गेंदबाज से एक कदम आगे रहने की कोशिश कर रही थी, और गेंद जहां भी आ रही थी, वहीं खेलने का प्रयास कर रही थी। मेरा मकसद फील्ड के हिसाब से खेलना था, ताकि गेंदबाज दबाव में आ जाए।”

खास बात यह रही कि इस साझेदारी के दौरान दोनों के बीच शायद ही कोई बातचीत हुई। उन्होंने आगे बताया, “प्रिया दी के साथ बात यह है कि हम ज्यादा बातचीत नहीं करते। वह चुपचाप अपने ही जोन में खेल रही थीं। मैं भी ऐसे ही जोन में थी, जहां मैं ज्यादा बात नहीं कर रही थी, बस अपना ध्यान खेल पर लगाए हुए चुपचाप अपने शॉट्स खेल रही थी। वह भी यही सोच रही थीं कि गेंदबाज गेंद कहां डालेगी और वह उसे कहां हिट करके बाउंड्री हासिल कर सकती हैं। इस साझेदारी के दौरान हमने बिल्कुल भी बात नहीं की। वह भी आक्रामक क्रिकेट खेल रही थीं और मैं भी दूसरे छोर से आक्रामक खेल रही थी।”

प्रिया ने बताया कि जब तनीषा ने 50 रन पूरे किए, तो उन्हें याद दिलाना पड़ा कि वह डगआउट की तरफ देखकर अभिवादन करें। तनीषा ने कहा, “मैं बस स्ट्राइक लेना और खेलना जारी रखना चाहती थी।”

हालांकि, प्रिया 28 गेंदों पर 59 रन बनाकर आउट हो गईं, लेकिन इसके बाद श्वेता सहरावत ने 8 गेंदों पर 26 रन (जिसमें 3 छक्के शामिल थे) जड़ दिए, जिससे दिल्ली का स्कोर 200 के पार पहुंच गया। लेकिन 15वें ओवर में जी. त्रिशा की गेंद पर तनीषा बोल्ड हो गईं, तब टीम का स्कोर 230/4 था। अपनी शानदार पारी में उन्होंने 25 चौके और 1 छक्का लगाया था। कुल मिलाकर, उनके 106 रन बाउंड्री से आए।

पारी के आखिरी ओवरों में दिल्ली की लय थोड़ी बिगड़ी, लेकिन नजमा खान और दीक्षा शर्मा की छोटी मगर असरदार पारियों और कप्तान सोनी यादव के 15 रनों की मदद से टीम एक रिकॉर्ड स्कोर तक पहुंच गई। इससे पहले का सबसे बड़ा स्कोर गोवा का था, जिसने 2019/20 में अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ 257/2 रन बनाए थे। तनीषा ने बताया कि यह आक्रामक खेल पूरी तरह से पहले से तय था।

उन्होंने कहा, “आजकल टी20 क्रिकेट ऐसा ही हो गया है। हमने बल्लेबाजी के लिए पहले ही योजना बना ली थी कि हमें 6 ओवरों में 50 रन चाहिए, लेकिन असल में हमने उससे दोगुने रन बना लिए (दिल्ली ने पावरप्ले में 93/1 रन बनाए)। जो भी बल्लेबाज क्रीज पर आ रही थी, हम सब बस एक ही बात कर रहे थे: हमें आक्रामक होकर खेलना है और विरोधी टीम पर हावी रहना है।”

हैदराबाद की टीम कभी भी लक्ष्य के करीब नहीं पहुंच पाई। त्रिशा ने 52 गेंदों पर 80 रन बनाए, और कप्तान प्रणवी चंद्रा ही एकमात्र दूसरी बल्लेबाज रहीं, जो 20 रनों का आंकड़ा पार कर सकीं। अंत में उनकी टीम 154/8 रन ही बना सकी और 108 रनों से हार गई। मैच खत्म होने के बाद ही तनीषा को पता चला कि दिल्ली ने एक नया रिकॉर्ड बना लिया है।

उन्होंने कहा, “जब हमारा मैच खत्म हुआ, तो मैच रेफरी (नियति कौस्तुभ लोकुर) ने हमें बताया कि एक रिकॉर्ड बन गया है। मुझे लगता है कि जब कोई ऐसी उपलब्धि मिलती है जिसकी उम्मीद न हो, तो बहुत अच्छा लगता है। मुझे लगा कि यह सब ईश्वर की ही योजना थी।”

महिलाओं के टी20 स्कोर की सर्वकालिक सूची में दिल्ली का कुल स्कोर 11वें नंबर पर है। इससे ऊपर के सभी 10 स्कोर अंतरराष्ट्रीय मैचों के हैं, जिनमें 2023/24 में चिली के खिलाफ अर्जेंटीना के 427/1 और 333/1 के स्कोर सबसे ऊपर हैं। यह तनीषा का पहला टी20 शतक था, और यह तब आया जब इससे ठीक पहले वाली पारी में वह शून्य पर आउट हो गई थीं। तनीषा का कहना है कि उन्होंने शून्य पर आउट होने और शतक लगाने, दोनों ही स्थितियों को सहजता से लेना सीख लिया है।

उन्होंने कहा, “यह मेरा पहला टी20 शतक था, लेकिन इसे लगाने के बाद भी मुझे बिल्कुल सामान्य महसूस हुआ। इस मैच से पहले मैं शून्य पर आउट हो गई थी, और तब भी मेरा रिएक्शन सामान्य ही था। जाहिर है, इंसान को खुद से उम्मीद होती है कि उसे अच्छा प्रदर्शन करना है। दूसरे मैच में भी ऐसी ही उम्मीद थी कि मुझे अच्छा करना है, और मैंने बस सामान्य तरीके से खेला। भले ही रन बनाने का काफी दबाव या उत्साह होता है, लेकिन खेलते समय मैंने यह मान लिया है कि शून्य और शतक, या उतार-चढ़ाव तो आते ही रहेंगे। रिकॉर्ड तो टूटने के लिए ही होते हैं। अगर कोई मुझसे बेहतर खेलता है, तो वह भी रिकॉर्ड बनाएगी, और फिर मैं भी भविष्य में रिकॉर्ड बनाने की कोशिश करती रहूंगी।”

यह पारी एक शानदार साल के बाद आई है। जुलाई में तनीषा ‘इंडिया ए’ के ​​साथ इंग्लैंड के दौरे पर गई थीं, जहां उन्होंने तीसरे वनडे मैच में अर्धशतक लगाया था। 2026 दिल्ली प्रीमियर लीग में, वह फाइनलिस्ट टीम ‘साउथ दिल्ली सुपरस्टार्स’ के लिए सात पारियों में 117.05 के स्ट्राइक रेट से 206 रन बनाकर तीसरी सबसे ज्यादा रन बनाने वाली खिलाड़ी रहीं। सितंबर में ‘ऑस्ट्रेलिया ए’ के ​​खिलाफ, उन्होंने तीन वनडे मैचों में 120 रन बनाए, जिसमें 363 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए लगाया गया एक अर्धशतक भी शामिल था। इसके अलावा, एकमात्र अनौपचारिक टेस्ट मैच में उन्होंने 92 रन बनाए।

उन्होंने कहा, “मैं इसका श्रेय अपने कोच, दिशांत याग्निक (जो वर्तमान में बेंगलुरु में बीसीसीआई सीओई में फील्डिंग कोच हैं) को देना चाहूंगी। उन्होंने मेरी स्किल्स पर बहुत ध्यान दिया है और मेरी काफी मदद की है। मैं दिल्ली में आरपीसीए में सुरजीत सर और अजय वर्मा सर के साथ प्रैक्टिस करती हूं। वे मेरी स्किल्स को बेहतर बनाने में मदद करते हैं और मुझसे काफी प्रैक्टिस करवाते हैं, इसलिए इसका श्रेय उन्हें जाता है।”

उन्होंने ‘इंडिया ए’ के साथ बिताए अपने समय का भी जिक्र किया, जिससे उन्हें काफी कुछ सीखने को मिला। “इंडिया ए में माहौल ऐसा है कि मुझे सीनियर खिलाड़ियों से बहुत कुछ सीखने को मिला – वे बहुत अनुशासित रहते हैं और एक तय रूटीन का पालन करते हैं। इंडिया ए में रहने की वजह से ही मैं खुद में सुधार देख पा रही हूं। मैं अब अपने रूटीन को अच्छे से फॉलो कर पा रही हूं; मेरा शरीर एक्टिव है और मुझमें काफी ऊर्जा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि मैंने इंडिया ए में देखा है कि जब हम वहां जाते हैं, तो देखते हैं कि सीनियर खिलाड़ी पहले से ही खेल रहे हैं। उन्हें ध्यान से देखने और समझने पर पता चलता है कि वे खुद को कैसे फिट रखते हैं और लगातार खेलते रहते हैं। मैंने यह भी देखा है कि वे कितने अनुशासित हैं। इसलिए, मैं भी उसी रास्ते पर चलना चाहती हूं – अनुशासन ही वह चीज है जिससे मुझे अच्छे नतीजे मिल रहे हैं।”

यह खास दिन कोच्चि में हुए विमेंस प्रीमियर लीग (डब्ल्यूपीएल) 2027 ऑक्शन के 24 घंटे से भी कम समय बाद आया, जिसमें तनीषा को किसी भी टीम ने नहीं खरीदा। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि पिछले 3-4 सालों से मैं डब्ल्यूपीएल ट्रायल्स के जरिए कोशिश कर रही हूं, और जब ऐसा नहीं होता, तो जाहिर है, बुरा तो लगता ही है। लेकिन आपके आस-पास का माहौल और सकारात्मक लोग आपकी सोच को बदल सकते हैं। इसका पूरा श्रेय मैं अपने करीबी दोस्तों, फिजियो, कोच और अपने माता-पिता को देना चाहूंगी।”