लखनऊ, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश की राजनीति में बुंदेलखंड का अपना अलग महत्व है और इस क्षेत्र का दिल कहे जाने वाले झांसी जिले की सियासत पूरे प्रदेश को प्रभावित करती है। झांसी जिला उत्तर प्रदेश के दक्षिण में स्थित है, जिसे बुंदेलखंड का द्वार कहा जाता है। यह जिला झांसी मंडल का प्रशासनिक मुख्यालय भी है।
प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से झांसी जिले में चार प्रमुख सीटें आती हैं। इन चारों सीटों का अपना अलग सियासी गणित है। बबीना उत्तर प्रदेश की 403 सीटों में से 222वीं सीट है। यह झांसी जिले में स्थित एक सामान्य यानी अनारक्षित सीट है। पिछले चुनाव में यहां करीब 3,31,743 पंजीकृत मतदाता थे। वर्तमान में यहां से भाजपा के राजीव सिंह ‘परिच्छा’ विधायक हैं।
झांसी नगर (सामान्य) जिले की सबसे चर्चित सीट मानी जाती है। यह 403 में से 223वीं सीट है। पिछले चुनाव में यहां सबसे ज्यादा करीब 4,22,164 मतदाता थे। यहां से भाजपा के रवि शर्मा विधायक हैं।
मऊरानीपुर 403 में से 224वीं सीट है और यह झांसी जिले की इकलौती आरक्षित सीट है। यह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। पिछले चुनाव में यहां करीब 4,13,770 मतदाता थे। यहां से अपना दल (सोनेलाल) की डॉ. रश्मि आर्या विधायक हैं।
गरौठा 403 में से 225वीं सीट है। यह भी झांसी जिले की सामान्य सीट है। पिछले चुनाव में यहां लगभग 3,51,859 पंजीकृत मतदाता थे। यहां से भाजपा के जवाहर लाल राजपूत विधायक हैं।
अगर मौजूदा विधानसभा की बात करें तो झांसी की चार में से तीन सीटों पर भाजपा का कब्जा है, जबकि एक सीट सहयोगी दल अपना दल (सोनेलाल) के पास है। यानी जिले में एनडीए का पूरा दबदबा है।
भौगोलिक रूप से देखें तो झांसी जिला उत्तर में जालौन, पूर्व में हमीरपुर और महोबा, दक्षिण में मध्य प्रदेश के टीकमगढ़, दक्षिण-पश्चिम में ललितपुर और उत्तर-पूर्व में मध्य प्रदेश के दतिया जिले से घिरा हुआ है। यह शहर पहुंज नदी के तट पर, पहुंज और बेतवा नदी के बीच 285 मीटर की ऊंचाई पर बसा है। नई दिल्ली से इसकी दूरी करीब 415 किलोमीटर है। जिले का मुख्यालय झांसी शहर है।
इतिहास की बात करें तो यह शहर अपनी वीरता के लिए जाना जाता है। मूल दीवार वाला शहर अपने पत्थर के किले के चारों ओर फैला हुआ है। 1817 से 1854 तक इस शहर का नाम बलवंतनगर था। यह मराठा राजाओं की झांसी रियासत की राजधानी हुआ करती थी। 1854 में अंग्रेजों ने इस पर कब्जा कर लिया था, लेकिन रानी लक्ष्मीबाई ने जून 1857 से जून 1858 तक यहां शासन किया।
आज झांसी सड़क और रेल नेटवर्क से प्रदेश के सभी बड़े शहरों से अच्छी तरह जुड़ा है। पश्चिम-पूर्व गलियारा झांसी से होकर गुजरता है, जिसने यहां विकास को नई रफ्तार दी है। झांसी जिला पहले ललितपुर से जुड़ा हुआ था। 1891 में ललितपुर को झांसी में जोड़ा गया था और फिर 1974 में इसे फिर से अलग जिला बना दिया गया था।

