रांची, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। रांची में किराये पर लग्जरी गाड़ियां लेकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उन्हें गिरवी रखकर ठगी करने वाले गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है। ओरमांझी थाना पुलिस ने गिरोह की मुख्य सूत्रधार महिला समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में इस गिरोह की ओर से 20-25 से अधिक ट्रैवल एजेंसियों और निजी वाहन मालिकों को निशाना बनाए जाने की बात सामने आई है। ठगी की रकम करोड़ों रुपए तक पहुंचने की आशंका है।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान ज्योति कुमारी, विश्वजीत कुमार और मनोज कुमार के रूप में हुई है। ज्योति वाहन मालिकों और ट्रैवल एजेंसियों से संपर्क कर गाड़ियां किराये पर लेती थी। विश्वजीत कुमार रातू रोड स्थित शुभ यात्रा ट्रैवल्स का संचालक बताया गया है, जबकि मनोज कुमार गिरोह के एजेंट के रूप में काम करता था। वह गाड़ियों को गिरवी रखने के लिए लोगों और ठिकानों की तलाश करता था। पुलिस की शुरुआती पड़ताल में गिरोह के काम करने का तरीका सामने आया है।
पहले ज्योति कुमारी लग्जरी गाड़ियों के मालिकों या ट्रैवल एजेंसियों से संपर्क करती थी। इनमें स्कॉर्पियो, फॉर्च्यूनर और बोलेरो जैसी गाड़ियां शामिल थीं। शुरुआती कुछ महीनों तक वाहन मालिकों को समय पर किराया दिया जाता था, ताकि उनका भरोसा जीता जा सके। इसके बाद गिरोह कथित तौर पर वाहनों के फर्जी ओनरशिप एग्रीमेंट, अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) और अन्य जाली दस्तावेज तैयार करता था। इन दस्तावेजों के सहारे गाड़ियों को रांची और आसपास के इलाकों में लोगों के पास तीन से पांच लाख रुपए प्रति वाहन की दर से गिरवी रख दिया जाता था।
इस तरह गिरोह एकमुश्त रकम हासिल कर लेता था। वाहन मालिकों को जब किराया मिलना बंद हुआ और ज्योति से संपर्क नहीं हो पाया, तब उन्हें संदेह हुआ। कुछ मालिकों ने अपनी गाड़ियों में लगे जीपीएस ट्रैकर की लोकेशन जांची। इससे पता चला कि वाहन बताए गए स्थान पर नहीं, बल्कि दूसरे इलाकों और गैरेज में खड़े हैं। इसके बाद पीड़ित वाहन मालिकों ने एकजुट होकर ओरमांझी थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने गुप्त सूचना और तकनीकी जांच के आधार पर छापेमारी कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।
पुलिस के मुताबिक, विश्वजीत कुमार के खिलाफ कांके और ओरमांझी थानों में हत्या और आर्म्स एक्ट सहित कई मामले दर्ज होने की जानकारी मिली है। पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों, जाली दस्तावेज तैयार करने वालों और वाहनों को ठिकाने लगाने में मदद करने वाले लोगों की तलाश कर रही है। मामले में ठगी की कुल रकम और प्रभावित वाहन मालिकों की वास्तविक संख्या का पता लगाया जा रहा है।

