जम्मू, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा बहाल नहीं होने और कैबिनेट में मंत्रियों की सीमित संख्या को लेकर सियासी हलचल के बीच कांग्रेस ने भाजपा पर चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने की कोशिश का आरोप लगाया है। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रविंदर शर्मा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं मिलने के कारण यहां कई तरह की समस्याएं पैदा हो रही हैं। उन्होंने कैबिनेट विस्तार को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर संभावित नाराजगी को स्वीकार किया, लेकिन सरकार पर किसी बड़े खतरे की आशंका से इनकार किया।
रविंदर शर्मा ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस अपने विधायकों से बातचीत करेगी और पार्टी के अंदर किस विधायक ने क्या कहा है, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। उन्होंने माना कि मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने से कुछ विधायकों में नाराजगी हो सकती है। केंद्र शासित प्रदेश होने के कारण मंत्रियों की कुल संख्या सीमित है। ऐसे में पांच, छह और सात बार चुनाव जीतकर आए वरिष्ठ विधायकों की भी मंत्री बनने की इच्छा हो सकती है। इस स्थिति के कारण नेशनल कॉन्फ्रेंस के सामने भी मुश्किलें हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि यदि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल कर दिया गया होता तो मंत्रियों की संख्या बढ़ सकती थी। कई वरिष्ठ और इच्छुक विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती थी। मौजूदा सीमित व्यवस्था के कारण विधायकों की अपेक्षाओं को पूरा करना मुश्किल हो रहा है। भाजपा इस परिस्थिति का फायदा उठाने की कोशिश कर सकती है। भाजपा का तरीका चुनी हुई सरकारों को तोड़ने और अस्थिर करने का रहा है। उन्होंने इसे ऑपरेशन लोटस से जोड़ते हुए कहा कि भाजपा नाराज नेताओं और विधायकों से संपर्क करने की कोशिश कर रही होगी। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल उन्हें कोई बहुत बड़ी बगावत दिखाई नहीं दे रही है। यदि किसी विधायक ने अपनी नाराजगी पार्टी के अंदर जाहिर की है तो उसे बड़ी बगावत नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेशनल कॉन्फ्रेंस को बाहर से समर्थन दे रही है और उसका उद्देश्य चुनी हुई सरकार को स्थिर रखना है। कांग्रेस किसी भी चोर दरवाजे से सरकार हथियाने की कोशिश का समर्थन नहीं करेगी। उन्होंने दावा किया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस को कांग्रेस के छह विधायकों का पूरा समर्थन हासिल है।
कैबिनेट में कांग्रेस की हिस्सेदारी को लेकर रविंदर शर्मा ने कहा कि सरकार बनाने का जनादेश नेशनल कॉन्फ्रेंस को मिला है। यदि कांग्रेस भी मंत्रिमंडल में कोटा लेती तो सीमित पदों के कारण स्थिति और मुश्किल हो सकती थी। इसी वजह से कांग्रेस ने सरकार में शामिल होने के बजाय बाहर रहकर राज्य का दर्जा बहाल कराने की लड़ाई लड़ने का फैसला किया। कांग्रेस सड़क से लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर तक इस मांग को उठा रही है।
शर्मा ने केंद्र सरकार और भाजपा को मौजूदा हालात के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में एक निर्वाचित सरकार के साथ-साथ दूसरी व्यवस्था भी काम कर रही है। उन्होंने इसे दोहरी नियंत्रण व्यवस्था बताते हुए कहा कि लोग इस व्यवस्था के बीच पिस रहे हैं। उन्होंने कहा कि निर्वाचित सरकार के साथ कांग्रेस खड़ी है, जबकि प्रशासनिक नियंत्रण के कुछ महत्वपूर्ण अधिकार अब भी उपराज्यपाल के माध्यम से केंद्र के पास हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में पहले परिसीमन, फिर चुनाव और उसके बाद राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा किया गया था। सुप्रीम कोर्ट में भी राज्य का दर्जा जल्द बहाल करने को लेकर आश्वासन दिया गया, लेकिन निर्वाचित सरकार बनने के दो साल बाद भी यह मांग पूरी नहीं हुई। जिला उपायुक्तों और पुलिस अधीक्षकों सहित अधिकारियों के तबादलों और प्रशासनिक फैसलों पर नियंत्रण को लेकर भी निर्वाचित सरकार के सामने चुनौतियां हैं। केंद्र सरकार चाहती है कि निर्वाचित सरकार सफल न हो और राजनीतिक अस्थिरता बनी रहे।
उन्होंने भाजपा को मौकापरस्त पार्टी बताते हुए कहा कि वह सत्ता के लिए अलग-अलग दलों के साथ गठबंधन करती रही है। कांग्रेस का उद्देश्य लोकतंत्र, जनता के अधिकार और जम्मू-कश्मीर में स्थिर सरकार का समर्थन करना है। उन्होंने दोहराया कि राज्य का दर्जा बहाल कराने की लड़ाई जारी रहेगी और कांग्रेस नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार के साथ खड़ी रहेगी।

