अगरतला, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने शनिवार को कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय एकता, एकजुटता और अखंडता के प्रतीक थे, जिन्होंने स्वतंत्रता के बाद देश के एकीकरण में उल्लेखनीय योगदान दिया और जिसे हमेशा याद रखा जाएगा। साहा ने कहा कि उनके दृढ़ संकल्प और निर्णायक नेतृत्व ने उन्हें ‘भारत का लौह पुरुष’ की उपाधि दिलाई।
मुख्यमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर अगरतला के स्वामी विवेकानंद मैदान में आयोजित राष्ट्रीय एकता दिवस कार्यक्रम का उद्घाटन करने के बाद बोल रहे थे। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय एकता दिवस की शपथ के साथ हुई, जिसमें राष्ट्र की एकता, अखंडता और सुरक्षा को बनाए रखने की प्रतिबद्धता को दोहराया गया।
सभा को संबोधित करते हुए साहा ने कहा कि सरदार पटेल ने 1947 से 1949 के बीच 562 रियासतों को भारतीय संघ में एकीकृत करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि यह चुनौतीपूर्ण कार्य उनके दृढ़ संकल्प, दूरदर्शिता और निर्णायक नेतृत्व के माध्यम से पूरा हुआ।
मुख्यमंत्री ने उल्लेख किया कि सरदार पटेल की जयंती मनाने और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को सम्मानित करने के लिए वर्ष 2014 से प्रत्येक वर्ष 31 अक्टूबर को पूरे देश में राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना और नागरिकों को देश की एकता और अखंडता की रक्षा करने के लिए प्रेरित करना है।
सीएम साहा ने कहा कि देश विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों, परंपराओं और जीवन शैली वाले लोगों का घर है। इन विभिन्नताओं के बावजूद, विविधता में एकता की भावना ही राष्ट्र की मूल शक्ति है। उन्होंने कहा, “विविधता में एकता ही हमारी शक्ति है। इसलिए देश की एकता और अखंडता की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।”
मुख्यमंत्री ने त्रिपुरा के लोगों से सरदार वल्लभभाई पटेल के आदर्शों और सिद्धांतों से प्रेरणा लेने और राष्ट्रीय एकता, एकजुटता और अखंडता को बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराने का आह्वान किया।
इस कार्यक्रम में अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री सुधांशु दास, विधायक अंतरा सरकार देब और मीनारानी सरकार, सूचना एवं सांस्कृतिक मामलों के विभाग के सचिव किरण गिट्टे, युवा मामलों और खेल विभाग के सचिव तापस रॉय, पश्चिम त्रिपुरा के जिला मजिस्ट्रेट विशाल कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
इस आयोजन के अंतर्गत, यूनिटी रन स्वामी विवेकानंद मैदान से शुरू होकर उमाकांत मिनी स्टेडियम में समाप्त हुई, जिसमें प्रतिभागियों ने राष्ट्रीय एकता और एकजुटता के संदेश को दोहराया।

