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मेरा काम सभी को खुश करना नहीं, लोकप्रिय फैसला लेना बहुत आसान होता है: गौतम गंभीर

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हैमिल्टन, 1 नवंबर (आईएएनएस)। भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने जोर देकर कहा कि भारतीय टीम के साथ उनका काम सबको खुश करना नहीं है। उन्होंने कहा कि एक बड़ी टी20 टीम को संभालते समय वह लोकप्रिय फैसले लेने के बजाय सही निर्णय लेने पर ध्यान देते हैं।

भारतीय टीम अभी न्यूजीलैंड के दौरे पर है, जहां पांच मैचों की टी20 सीरीज में टीम 3-1 की अजेय बढ़त बना चुकी है। सेडन पार्क में पांचवें मैच से पहले ब्रॉडकास्टर्स से बातचीत में गंभीर ने कहा, “सबसे पहली बात, मेरा काम सबको खुश करना नहीं है। मेरा काम सही फैसले लेना है, न कि लोकप्रिय फैसले। मैं इसी काम के लिए यहां हूं। मुझे लगता है कि आज के दौर में सोशल मीडिया और बाहर होने वाली तमाम चर्चाओं के बीच चीजें कुछ अलग हो सकती हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “लोकप्रिय फैसला लेना बहुत आसान होता है। लेकिन मेरे लिए सही निर्णय लेना ज़्यादा ज़रूरी है। इसके साथ ही यह सुनिश्चित करना भी अहम है कि ड्रेसिंग रूम के अंदर खिलाड़ियों को पूरा भरोसा महसूस हो। जैसा कि आपने अभी कहा, टीम में बहुत टैलेंट है। खिलाड़ियों ने लंबे समय तक शानदार प्रदर्शन किया है, इसलिए वे निश्चित रूप से और मौके पाने के हकदार हैं। हम इसी सोच के साथ इस सीरीज में आगे बढ़ रहे हैं।”

गंभीर ने पांच मैचों की इस सीरीज में टीम के प्रदर्शन की भी तारीफ की, खासकर तब, जब पिछले एक महीने में टी20 का शेड्यूल काफी व्यस्त रहा है। भारत ने 17 अक्टूबर को घर पर वेस्टइंडीज के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज खत्म की थी, जिसके तुरंत बाद टीम न्यूजीलैंड पहुंच गई। फिर 22 अक्टूबर से न्यूजीलैंड में पांच मैचों की टी20 सीरीज की शुरुआत हुई, जहां बिल्कुल अलग परिस्थितियों में खेलते हुए भारत ने शुरुआती तीनों मैच जीते।

गंभीर ने कहा, “जाहिर है कि हमारे पास तैयारी के लिए बहुत कम समय था। हमने 17 तारीख को अपना पिछला मैच खत्म किया और 18 तारीख को उड़ान भरी। हमें बस एक प्रैक्टिस सेशन मिला। खिलाड़ियों की तारीफ करनी होगी कि उन्होंने कितनी जल्दी परिस्थितियों के हिसाब से खुद को ढाल लिया। कई खिलाड़ी पहली बार यहां आए हैं। हम सभी जानते हैं कि न्यूजीलैंड अपनी घरेलू सरजमीं पर कितनी खतरनाक टीम है।”

खिलाड़ियों को प्रेरित रखने के सवाल पर हेड कोच ने कहा, “जब आप अपने देश के लिए खेल रहे होते हैं, तो लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं होती। यह एक इंटरनेशनल मैच है, इसलिए आपको अपना सर्वश्रेष्ठ देना ही होता है। सभी जानते हैं कि देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका कितने कम लोगों को मिल पाता है। मेरे लिए हर मैच कुछ अलग करने, कुछ नया सीखने और खुद को बेहतर बनाने का एक मौका है। हम खेल को इसी नजरिए से देखते हैं। मेरी सोच में कोई भी मैच ‘बेकार’ (डेड रबर) नहीं होता और हमारी टीम के सभी खिलाड़ी भी इसी बात को मानते हैं।”