चंडीगढ़, 1 नवंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अगर उन्हें देश का प्रधानमंत्री बनना है तो उन्हें पूरी जिंदगी ‘मॉक पार्लियामेंट’ में ही बितानी चाहिए, क्योंकि असली संसद में उनका नंबर कभी नहीं आने वाला है।
गृह मंत्री अमित शाह ने यह टिप्पणी मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस की ओर से एक दिन पहले आयोजित मॉक ‘महाभियोग कार्यवाही’ के संदर्भ में की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी पिछले 15 वर्षों से चुनावों में लगातार हार का सामना कर रहे हैं और उनकी मां सोनिया गांधी का अपने बेटे को प्रधानमंत्री की कुर्सी पर देखने का सपना अब तक पूरा नहीं हो सका है।
एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि राहुल गांधी अपने जीवनकाल में प्रधानमंत्री बनने की उम्मीद छोड़ दें, क्योंकि उनके प्रधानमंत्री बनने की संभावना केवल मॉक पार्लियामेंट में ही हो सकती है।
इस दौरान अमित शाह ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ित परिवारों के दुखों पर नमक छिड़कने का आरोप लगाते हुए दिल्ली में कांग्रेस की रैली आयोजित करने को लेकर भी राहुल गांधी की आलोचना की। उन्होंने कहा, “1 नवंबर 1984 को कांग्रेस ने दिल्ली में हजारों निर्दोष सिखों का नरसंहार करवाया था और आज उसी दिन राहुल गांधी ने दिल्ली में रैली आयोजित की। यह पीड़ित परिवारों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।”
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि वह नरसंहार के दिन रैली आयोजित करने के लिए कांग्रेस की निंदा करते हैं। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी असंवेदनशीलता के कारण ‘मोहब्बत की दुकान’ लोगों को नफरत के अलावा कुछ नहीं दे पाएगी।
गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने दोषी कांग्रेस नेताओं के खिलाफ मामलों को दोबारा खुलवाया और उन्हें जेल भेजा। इसके साथ ही पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिया गया और उन्हें नौकरियां भी उपलब्ध कराई गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि सिख संगठनों और भाजपा की ओर से रैली नहीं करने की अपील के बावजूद राहुल गांधी ने रविवार को रैली आयोजित करने के लिए विदेश से निर्देश लिए।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “दिल्ली के व्यापारियों ने भी अपील की थी कि रैली दिवाली के बाद आयोजित की जाए, क्योंकि इससे कारोबार को भारी नुकसान होगा। लेकिन राहुल बाबा को सिख नरसंहार के दिन ही रैली करनी थी।”
इस बीच, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के खिलाफ पश्चिमी दिल्ली में भाजपा की ओर से आयोजित मार्च का नेतृत्व किया। इस मार्च का उद्देश्य ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ का संदेश देना और दंगा पीड़ितों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करना था।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में हरदीप सिंह पुरी ने 1984 के दंगों से जुड़ी अपनी यादें साझा कीं। उन्होंने कहा कि उस त्रासदी के समय उनके माता-पिता दिल्ली में थे और उनके कुछ हिंदू मित्रों ने उन्हें अपने घरों में शरण देकर मानवता और भाईचारे की मिसाल पेश की थी।
पुरी ने कहा कि यह नरसंहार केवल एक समुदाय की त्रासदी नहीं था, बल्कि पूरे देश के इतिहास पर लगा ऐसा घाव था, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि मानवता की रक्षा करना, पीड़ितों को न्याय दिलाना और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना उस दर्दनाक इतिहास से मिलने वाली सबसे बड़ी सीख है।

