कोच्चि, 4 नवंबर (आईएएनएस)। सतीशन के नेतृत्व वाली केरल सरकार को एक झटका देते हुए उच्च न्यायालय ने बुधवार को ‘मिलमा तिरुवनंतपुरम रीजनल कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स यूनियन’ के निदेशक मंडल को भंग करने के सरकार के आदेश को रद्द कर दिया और इसे तुरंत बहाल करने का निर्देश दिया।
डिवीजन बेंच ने डेयरी विकास निदेशक के 25 जुलाई के उस आदेश को अवैध घोषित कर दिया है, जिसके तहत चुनी हुई बोर्ड को भंग करके एक प्रशासनिक समिति नियुक्त कर दी गई थी। इस आदेश में कथित अनियमितताओं का हवाला दिया गया था, जिनमें सबरीमाला को घी की आपूर्ति से जुड़ी अनियमितताएं भी शामिल थीं।
न्यायमूर्ति डॉ. एके जयशंकरन नांबियार और न्यायमूर्ति ए.के. प्रीथा की बेंच ने यूनियन अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों द्वारा दायर एक अपील को स्वीकार कर लिया। उन्होंने यह अपील एक एकल न्यायाधीश (सिंगल जज) के उस फैसले के खिलाफ दायर की थी, जिसमें उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी।
एकल न्यायाधीश ने बोर्ड को भंग करने के सरकार के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद पदाधिकारियों ने डिवीजन बेंच के सामने उस आदेश को चुनौती दी।
अब इस फैसले के तहत चुनी हुई बोर्ड को बहाल करना होगा, जिससे सरकार का वह फैसला पलट गया है जिसमें बोर्ड की जगह एक प्रशासनिक समिति बनाई गई थी। बोर्ड को तब भंग किया गया था जब सबरीमाला मंदिर में घी के वितरण में अनियमितताओं के आरोप लगे थे।
इस मामले को लेकर केरल को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (मिल्मा) ने भी सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखा था।
3 अगस्त को मिल्मा ने कहा था कि सबरीमाला को घी की आपूर्ति में कोई चूक नहीं हुई है और केवल तय मानकों को पूरा करने वाला प्रीमियम गुणवत्ता का घी ही भेजा गया था।
मिल्मा के चेयरमैन के.एस. मणि ने कहा था कि घी को भेजने से पहले उसकी कड़ी गुणवत्ता जांच की गई थी। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि फेडरेशन ने कभी भी अपने उत्पादों की गुणवत्ता या शुद्धता से कोई समझौता नहीं किया है।
मणि ने बताया कि घी को पूरी तरह से सील किए गए 15 किलोग्राम के टिन में पैक किया गया था, जिससे रास्ते में किसी तरह की छेड़छाड़ या बदलाव की कोई गुंजाइश नहीं थी।
उन्होंने कहा कि मिल्मा को देवस्वोम अधिकारियों की ओर से गुणवत्ता को लेकर कोई आधिकारिक शिकायत नहीं मिली है और उन्हें आपूर्ति के लिए पूरा भुगतान भी मिल चुका है।
उन्होंने कहा कि डिलीवरी के बाद अगर मिल्मा के घी की जगह घटिया गुणवत्ता वाले उत्पाद रखे जाते हैं, तो यह एक गंभीर अपराध होगा और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
डिवीजन बेंच का यह फैसला सरकार के लिए एक बड़ा कानूनी झटका है क्योंकि इसने चुनी हुई बोर्ड के खिलाफ की गई प्रशासनिक कार्रवाई को पलट दिया है।
