इंदौर, 5 नवंबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश की व्यापारिक नगरी इंदौर में साइबर फ्रॉड की घटनाएं पुलिस के लिए चिंता बनी हुई है। यही कारण है कि पुलिस आमजन में जागृति लाने की कोशिश कर रही है और बता रही है कि वे साइबर फ्रॉड से अपने को कैसे बचाएं। इंदौर में इस साल पुलिस द्वारा 350 से ज्यादा सोशल मीडिया अकाउंट्स को रिकवर कराया गया है।
क्राइम ब्रांच इंदौर द्वारा छः करोड़ उन्यासी लाख तिरसठ हजार सत्रह रुपये की राशि आवेदकों को वापस कराई है। इसके अलावा नाम और फोटो का दुरुपयोग कर बनाए गए 450 से अधिक फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट ब्लॉक कराए गए हैं। इंदौर की अपराध शाखा आम लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाए हुए हैं और बता रही है कि वे साइबर फ्रॉड के किस तरह से शिकार बनते हैं। एपीके फ्रॉड फर्जी ऐप के जरिए मोबाइल का एक्सेस लेकर बैंक खाते से राशि निकाल ली जाती है।
इसी तरह इन्वेस्टमेंट एवं टास्क फ्रॉड ऑनलाइन ट्रेडिंग, गेमिंग एवं वर्क फ्रॉम होम के नाम पर ठगी होती है। डिजिटल अरेस्ट की घटनाएं भी लगातार बढ़ रही हैं और पुलिस ने बताया है कि फ्रॉड करने वाला व्यक्ति फ्रॉड फर्जी पुलिस, सीबीआई एवं कस्टम अधिकारी बनकर डराता है और डिजिटल अरेस्ट कर पैसे ऐंठ लेता है । इसके अलावा भी कई तरीके अपनाए जाते हैं जिनमें एआई डीपफेक एवं वॉइस क्लोनिंग परिचितों की आवाज या चेहरा बनाकर आपातकाल के नाम पर पैसे मांगता है।
फर्जी लोन ऐप फ्रॉड तत्काल लोन देकर मनमाना ब्याज वसूलना एवं फोटो से ब्लैकमेल भी किया जाता है। बैंकिंग एवं केवायसी के नाम पर भी धोखाधड़ी की जाती है, बैंक अधिकारी बनकर केवायसी, पेन एवं क्रेडिट कार्ड अपडेट के नाम पर ठगी की जाती है। साइबर फ्रॉड करने वाले नए-नए तरीके अपनाते हैं और उनके लिए सबसे आसान तरीका बिजली बिल के नाम पर ठगी करना है।
बिजली कनेक्शन काटने का फर्जी एसएमएस भेजकर रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड करवाते है और बैंक में जमा पैसा हड़प लेते हैं। पुलिस का कहना है कि साइबर धोखाधड़ी की सूचना जितनी जल्दी दी जाएगी, ठगी की राशि को संबंधित बैंक खाते में होल्ड कराने एवं वापस प्राप्त करने की संभावना उतनी ही अधिक हो सकती है। पुलिस ने जागृति लाने के लिए पोस्टर तक जारी किए हैं।
–आईएएनएस
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