Sunday, May 24, 2026
SGSU Advertisement
Home स्वास्थ्य महिलाओं की पहचान का संकट और मानसिक स्वास्थ्य पर विचार गोष्ठी आंगनबाड़ी...

महिलाओं की पहचान का संकट और मानसिक स्वास्थ्य पर विचार गोष्ठी आंगनबाड़ी में आयोजित

0
33

गोविंदपुरा : 30 मार्च / सत्यमेव मानसिक विकास केंद्र की निदेशिका एवं मनोवैज्ञानिक स्मिता कुमारी ने आंगनबाड़ी क्रमांक 710, गोविंदपुरा में एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया। इसका विषय था – “महिलाओं की पहचान: एक संकट और मानसिक स्वास्थ्य पर इसका प्रभाव”।

साथ ही, बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होने वाले बच्चों को सही दिशा में करियर मार्गदर्शन भी दिया गया।

महिला एवं बाल अधिकारों पर विस्तृत चर्चा

स्मिता कुमारी ने कार्यक्रम में लड़कियों में आर्थिक संबलता की आवश्यकता, घरेलू हिंसा की रोकथाम, तथा महिलाओं और बच्चों के संवैधानिक अधिकारों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि कैसे आर्थिक रूप से कमजोर या निर्भर लड़की किसी न किसी रूप में मानसिक या शारीरिक शोषण की शिकार होती रहती है।

“समाज की पितृसत्तात्मक मानसिकता ने लड़कियों को यह समझा दिया है कि शोषण उनकी नियति है। वे इससे मुक्ति की आशा तक नहीं कर पातीं। परंतु यदि लड़कियाँ आर्थिक रूप से सबल हों, तो वे अपने ऊपर हो रही हर प्रकार की हिंसा का विरोध और निराकरण कर सकती हैं।”

मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर

उन्होंने कहा कि लड़कियों को पैदा होने से लेकर जीने का अधिकार भी पितृसत्तात्मक समाज के हाथ में है। इससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है, और यह प्रभाव आने वाली पीढ़ियों की मानसिकता पर भी नकारात्मक रूप से पड़ता है।

महिलाओं की प्रतिक्रिया – पहला अनुभव

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित महिलाओं ने बताया कि यह पहला अवसर था जब वे किसी ऐसे आयोजन में शामिल हुईं, जहाँ मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर चर्चा हुई। उनके लिए यह एक नया और जागरूकता भरा अनुभव रहा।

स्क्रीनिंग में मिली गंभीर समस्या का समाधान

कार्यक्रम के अंत में हुई स्क्रीनिंग के दौरान एक महिला ऐसी मिली, जो डिप्रेशन और आत्महत्या के विचारों से गुजर रही थी। उसे तुरंत अलग से काउंसलिंग दी गई तथा चिकित्सा से जोड़ा गया।

प्रश्नोत्तरी और सहभागिता

मानसिक स्वास्थ्य, महिलाओं के अधिकारों और करियर मार्गदर्शन पर कई सवाल-जवाब हुए। इस कार्यक्रम में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मधु सोनी, सहायिका मंजू तथा लगभग 20 महिलाएँ शामिल रहीं।