Saturday, June 13, 2026
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सही मायने में भारतीय संस्कृति को अपनाना ही आधुनिकता है

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डॉ कपिल भार्गव
आधुनिक युग में ‘आधुनिकता’ को प्रायः पाश्चात्य जीवन-शैली, उपभोगवाद और तकनीकी प्रगति से जोड़ दिया जाता है। परंतु भारतीय दृष्टि से आधुनिकता का वास्तविक अर्थ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ते हुए समयानुकूल विकास करना है। इस शोधात्मक लेख में यह प्रतिपादित किया गया है कि भारतीय संस्कृति को सही अर्थों में अपनाना ही सच्ची आधुनिकता है।

भारतीय संस्कृति का स्वरूप
भारतीय संस्कृति सहिष्णुता, समन्वय, त्याग, करुणा, सत्य और अहिंसा जैसे मूल्यों पर आधारित है। यह संस्कृति ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को पोषित करती है तथा व्यक्ति और समाज दोनों के संतुलित विकास पर बल देती है।

आधुनिकता की अवधारणा
आधुनिकता का अर्थ केवल भौतिक प्रगति नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तर्कशीलता, समानता और मानवाधिकारों का सम्मान भी है। जब आधुनिकता मूल्यहीन उपभोग तक सीमित हो जाती है तब वह समाज को दिशाहीन बना देती है।

भारतीय संस्कृति और आधुनिकता का समन्वय
भारतीय संस्कृति स्थिर नहीं बल्कि गतिशील रही है। समय-समय पर इसने नए विचारों को आत्मसात किया है। योग, आयुर्वेद, लोकतंत्र, पर्यावरण संरक्षण और पारिवारिक मूल्य आधुनिक समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं।

वर्तमान संदर्भ में प्रासंगिकता
आज के वैश्विक युग में भारत की सांस्कृतिक पहचान उसकी सबसे बड़ी शक्ति है। नई पीढ़ी यदि तकनीक के साथ संस्कारों को अपनाए तो वह सच्चे अर्थों में आधुनिक कहलाएगी।

अतः यह स्पष्ट है कि भारतीय संस्कृति का सम्यक् अनुकरण ही आधुनिकता का वास्तविक स्वरूप है। परंपरा और प्रगति का संतुलन ही समाज को स्थायित्व और दिशा प्रदान करता है।