“कला, ज्ञान की प्रयोगशाला है”: टैगोर जयंती पर आरएनटीयू में ‘प्रणति पर्व’ का भावपूर्ण...
गुरुदेव की मूर्ति पर पुष्पांजलि, कविता पाठ और ‘गीतांजलि’ पुस्तिका का लोकार्पण
भोपाल, 7 मई | रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय (आरएनटीयू) के मुक्तधारा सभागार में गुरुदेव रबीन्द्रनाथ...
जब बाल मन में ‘लक्ष्मण रेखा’ से बैठा डर, ‘सीता हरण’ अध्याय से जुड़ी...
नई दिल्ली, 6 मई (आईएएनएस)। राजसी ठाट-बाट और शानो-शौकत वाला एक अमीर खानदान। बंगाल के सबसे बड़े शहर कोलकाता में उस ठाकुर खानदान का रुतबा था। दूर-दूर तक लोग इस परिवार की चर्चा किया करते थे। इसी खानदान में जब देवेंद्रनाथ ठाकुर और सारदा देवी की 14वीं संतान के रूप में बेटा आया, तो किसी ने नहीं सोचा था कि सारी दुनिया में एक दिन उसके नाम का डंका बजेगा। बात हो रही है रवींद्रनाथ टैगोर की।
‘टेक्नोलॉजी लॉ’ पुस्तक लोकार्पण पर अर्जुन राम मेघवाल बोले, एआई इंसानों की जगह नहीं...
नई दिल्ली, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। “इनोवेशन, टेक्नोलॉजी या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस किसी इंसान की जगह नहीं ले सकते। एआई कई चुनौतियां पेश करता है, और हम तकनीकी रूप से अत्यधिक उन्नत हो चुके हैं, लेकिन यह किसी व्यक्ति की जगह नहीं ले सकता,” केंद्र सरकार के कानून एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने प्रौद्योगिकी कानून: विनियम, साइबर नीति और डिजिटल परिदृश्य पुस्तक के लोकार्पण अवसर पर कहा। यह पुस्तक रॉडनी डी. राइडर और निखिल नरेन द्वारा लिखी गई है।
बलराज साहनी जयंती: जब सूट-बूट की वजह से ‘दो बीघा जमीन’ के लिए रिजेक्ट...
मुंबई, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। देश नया-नया आज़ाद हुआ था और हिंदी सिनेमा में ऐसे एक्टर ने जन्म लिया, जो आम आदमी के दर्द, उसकी परेशानियों को ना सिर्फ स्क्रीन पर निभाए बल्कि अपने संवाद से लोगों को रोने पर मजबूर कर दें।
स्मृति शेष: ‘जब शब्द तलवार बन जाएं’, राष्ट्रकवि दिनकर की जीवंत ज्वाला
नई दिल्ली, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। 'वर्षों तक वन में घूम-घूम, बाधा-विघ्नों को चूम-चूम, सह धूप-घाम, पानी-पत्थर, पांडव आए कुछ और निखर। सौभाग्य न सब दिन सोता है, देखें, आगे क्या होता है...।' यह रचना है राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की। हर साल की 24 अप्रैल की पहचान उस आवाज की स्मृति से है, जिसने शब्दों को शस्त्र बना दिया था। यह वह दिन है जब हिन्दी साहित्य के सूर्य, राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर', इस दुनिया से विदा हुए थे।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का विश्व पुस्तक दिवस पर संदेश, कहा-किताबें हमारे विचारों को...
गुवाहाटी, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। विश्व पुस्तक दिवस के अवसर पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गुरुवार को व्यक्तियों और समाजों को गढ़ने में पुस्तकों के चिरस्थायी महत्व पर जोर दिया। उन्होंने सभी पीढ़ियों में पढ़ने की एक मजबूत संस्कृति विकसित करने के लिए नए सिरे से प्रयास करने का आह्वान किया।
विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस: किताबें सिर्फ पन्ने नहीं, अनुभव और कल्पना की हैं...
नई दिल्ली, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। 23 अप्रैल सिर्फ एक तारीख नहीं है, बल्कि ज्ञान, कल्पना और कहानियों की उस दुनिया का उत्सव है, जहां हर पन्ना एक नया अनुभव लेकर आता है। इस दिन श्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस मनाया जाता है, जो हमें याद दिलाता है कि किताबें केवल शब्दों का संग्रह नहीं होतीं, बल्कि वे हमारे विचारों को दिशा देती हैं, हमारी सोच को विस्तार देती हैं और हमें अनगिनत दुनियाओं की सैर कराती हैं।
राष्ट्रीय शबद निरंतर सम्मान–2026 से सम्मानित हुए वरिष्ठ साहित्यकार संतोष चौबे
भोपाल : 14 अप्रैल/ कबीर जन विकास समूह द्वारा आयोजित कबीर जन उत्सव–2026 में श्री संतोष चौबे, वरिष्ठ कवि–कथाकार, निदेशक, विश्व रंग एवं कुलाधिपति,...
यादों में रेणु : ‘मैला आंचल’ के ‘गुलफाम’, समाज, साहित्य और सादगी को साधने...
नई दिल्ली, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। हर साल की 11 अप्रैल कैलेंडर पर दर्ज सिर्फ एक तारीख नहीं है। यह तारीख उस आवाज की खामोशी का प्रतीक है जिसने गांव, खेत, गंध, लोक और मनुष्य के छोटे-छोटे सुख-दुख को शब्दों में ऐसा ढाला कि वे हमेशा के लिए जीवंत हो गए। साल 1977 में 11 अप्रैल को ही साहित्यकार फणीश्वरनाथ रेणु का निधन हुआ था। इस दिन उनकी आवाज हमेशा के लिए खामोश जरूर हो गई, लेकिन उनकी लिखावट आज भी रंगमंच से लेकर लोगों के जीवन में उपस्थित है।
‘पाठ श्रृंखला’ के अंतर्गत ‘सविता भार्गव’ के उपन्यास ‘जहाज पाँच पाल वाला’ पर हुई...
भोपाल : 7 अप्रैल/ वनमाली सृजन पीठ और आईसेक्ट पब्लिकेशन द्वारा 'पाठ श्रृंखला' के अंतर्गत सविता भार्गव' के उपन्यास 'जहाज पाँच पाल वाला' पर...




