भारतीय ज्ञान परंपरा के उज्ज्वल प्रतीक है ‘ख्याल संग्रह’ – संतोष चौबे
भोपाल : 1 अक्टूबर/ 'ख्याल संग्रह की दोनों पुस्तकें शास्त्रीय संगीत के सबसे पुराने ग्वालियर घराने की प्राचीन पारंपरिक बंदिशों के नायाब संग्रह हैं।...
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में जनजातीय नायकों के योगदान का पुनर्पाठ आवश्यक –...
भोपाल : 30 सितम्बर/ स्कोप ग्लोबल स्किल्स विश्वविद्यालय (एसजीएसयू), भोपाल के मानविकी एवं उदार कला संकाय द्वारा आयोजित तथा भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद...
नालंदा की ऐतिहासिक भूमि पर विश्वरंग : ज्ञान, भाषा, साहित्य, कला और एशिया के...
संतोष चौबे
भारत को समझने के लिए केवल उसका राजनीतिक इतिहास पढ़ना पर्याप्त नहीं है। भारत का एक दूसरा इतिहास भी है—विश्वविद्यालयों, गुरुकुलों, पुस्तकालयों, यात्राओं,...
बांग्लादेश: बंगबंधु की किताब बेचने पर पब्लिशिंग हाउस कर्मियों को किया गया परेशान
ढाका, 30 सितंबर (आईएएनएस)। बांग्लादेश में अभिव्यक्ति की आजादी पर पाबंदियों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच, ढाका में पब्लिशिंग हाउस 'यूनिवर्सिटी प्रेस लिमिटेड' (यूपीएल) के दो कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार चर्चा में है। स्थानीय मीडिया के अनुसार बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की लिखी किताब "द अनफिनिश्ड मेमोयर्स" की बिक्री के कारण उन्हें परेशान किया गया और पुलिस के पास ले जाया गया।
विश्वरंग नालंदा : पूर्वोत्तर भारत एवं दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के परिप्रेक्ष्य में भाषा,...
भोपाल : 29 सितंबर / रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल से जुड़े विश्वरंग का आठवां संस्करण 3 से 8 अक्टूबर 2026 तक बिहार के वैशाली,...
मानद डॉक्टरेट से सम्मानित हुए आरएनटीयू के कुलाधिपति संतोष चौबे, तकनीक से साहित्य तक...
भोपाल : 21 सितम्बर/ खंडवा में जन्मे एक इंजीनियर ने जब तकनीक को आम लोगों तक पहुंचाने का सपना देखा, तब कंप्यूटर आज की...
विश्वरंग, भोपाल का आठवां संस्करण नालंदा, बिहार में 3 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक
भोपाल : 20 सितम्बर/ भारत की भाषाई, साहित्यिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को समकालीन संदर्भों से जोड़ते हुए नालंदा में एक राष्ट्रीय स्तर के...
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का सिएटल एडिशन शुरू, पढ़ने की अहमियत और मानवीय कल्पना पर...
सिएटल, 19 सितंबर (आईएएनएस)। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (जेएलएफ) के सिएटल संस्करण के तीसरे आयोजन की शुरुआत पढ़ने, मानवीय कल्पना और साहित्य की भूमिका के बचाव के साथ हुई। लेखकों, जनप्रतिनिधियों और राजनयिकों ने इस बात पर चर्चा की कि किस तरह कहानियां अलग-अलग संस्कृतियों को जोड़ने का दम रखती हैं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के तेजी से बदलते दौर में भी किताबें और साहित्य मानव अनुभव को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम बने हुए हैं।
साहित्य विचारों की आजादी का मंच, पढ़ना अहिंसक प्रतिरोध: अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल
सिएटल, 19 सितंबर (आईएएनएस)। भारतीय मूल की अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने पढ़ने की अहमियत समझाई है। उन्होंने लोगों से सेंसरशिप का विरोध करने और चुनौती दी गई किताबों को पढ़ना जारी रखने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि साहित्य अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करने और दबाई जा रही आवाजों को सामने लाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
काका हाथरसी: ऐसे कवि जो लोगों को हंसाने के बाद सामाजिक समस्याओं को लेकर...
नई दिल्ली, 17 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदी साहित्य में कुछ रचनाकार ऐसे रहे हैं, जिन्होंने लोगों को हंसाते-हंसाते समाज की गंभीर सच्चाइयों से रूबरू कराया। काका हाथरसी उन्हीं नामों में शामिल हैं। उनकी कविताएं सुनकर श्रोता ठहाके लगाते थे, लेकिन कविता के अर्थ पर गौर किया जाता, तो उसमें समाज, व्यवस्था और आम जिंदगी की कई विसंगतियां नजर आती थीं। यही उनकी लेखनी की खासियत थी। हास्य को उन्होंने सिर्फ मनोरंजन का जरिया नहीं बनाया, बल्कि उसके जरिए सामाजिक कमियों और अव्यवस्थाओं पर भी तीखा कटाक्ष किया।





