शिक्षा, विज्ञान संचार और सामाजिक उद्यमिता में योगदान के लिए संतोष चौबे को मानद...

भोपाल : 8 सितम्बर/ शिक्षा, सामाजिक उद्यमिता, साहित्य, विज्ञान संचार और भारतीय भाषाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए संतोष चौबे को बाबू...

टैगोर नाट्य महोत्सव के तीसरे दिन ‘संभव’ आर्ट ग्रुप, दिल्ली ने किया संतोष चौबे...

भोपाल : 8 सितम्बर/ टैगोर नाट्य महोत्सव के तीसरे दिन मंगलवार को रवीन्द्र भवन में कथाकार संतोष चौबे की दो चर्चित कहानियों ‘उनके हिस्से...

यादों में भारतेंदु : आधुनिक हिंदी साहित्य के ‘पितामह’, ‘रसा’ तखल्लुस से उर्दू गजलें...

नई दिल्ली, 8 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदी साहित्य के इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं, जिन्होंने बहुत कम उम्र में इतना बड़ा काम कर दिया कि आने वाली पीढ़ियां भी उन्हें याद करती रहीं। भारतेंदु हरिश्चंद्र उन्हीं नामों में से एक हैं। उन्होंने महज 34 साल की जिंदगी में कविता, नाटक, पत्रकारिता और गद्य लेखन के जरिए हिंदी को नई दिशा दी। यही वजह है कि उन्हें 'आधुनिक हिंदी साहित्य का पितामह' कहा जाता है।

रवीन्द्र भवन में ‘संभव’ आर्ट ग्रुप, दिल्ली ने किया संतोष चौबे की कहानी ‘गरीबनवाज’...

भोपाल : 7 सितम्बर/ टैगोर नाट्य महोत्सव के दूसरे दिन सोमवार को रवीन्द्र भवन में कथाकार संतोष चौबे की चर्चित कहानी ‘गरीबनवाज’ का प्रभावशाली...

टैगोर नाट्य महोत्सव के पहले दिन गूंजा टैगोर का संगीत और रंगमंच, संतोष चौबे...

भोपाल : 6 सितम्बर/ टैगोर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय एवं विश्व रंग फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित चार दिवसीय ‘टैगोर नाट्य महोत्सव’ का रविवार...

गालिब की जिंदगी से लेकर द्रौपदी तक…सुरेंद्र वर्मा की कलम ने हर किरदार को...

नई दिल्ली, 6 सितंबर (आईएएनएस)। सुरेंद्र वर्मा हिन्दी साहित्य और रंगमंच की दुनिया का ऐसा नाम हैं, जिन्होंने इतिहास, मिथक और इंसानी रिश्तों को अपनी अलग नजर से देखा। उन्होंने पुराने किरदारों और कहानियों को सिर्फ दोहराया नहीं बल्कि उन्हें आज के समाज और आधुनिक सोच से जोड़कर पेश किया। कालिदास हों, द्रौपदी हों या मिर्जा गालिब, उनकी कलम ने इन जाने-पहचाने चेहरों के भीतर छिपे उन सवालों को सामने रखा, जिन पर आमतौर पर कम बात होती है।

आईआईटी खड़गपुर, मुंबई पोर्ट अथॉरिटी और एएसआई ने एलिफेंटा द्वीप के समुद्री इतिहास पर...

कोलकाता, 2 सितंबर (आईएएनएस)। आईआईटी खड़गपुर, मुंबई पोर्ट अथॉरिटी और आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) ने एक जॉइंट रिसर्च प्रोजेक्ट शुरू किया है। इसका मकसद यह पता लगाना है कि ऐतिहासिक रूप से जलवायु में उतार-चढ़ाव और समुद्र के जलस्तर में बदलाव ने एलिफेंटा द्वीप और भारत के पश्चिमी तट के आस-पास समुद्री व्यापार और मानवीय गतिविधियों को कैसे प्रभावित किया।

कलम की बेबाक आवाज अमृता प्रीतम, जिन्होंने अपनी शर्तों पर लिखी इश्क और समाज...

नई दिल्ली, 30 अगस्त (आईएएनएस)। कुछ लोग लिखते हैं ताकि उनकी बातें कागज पर दर्ज हो जाएं, लेकिन कुछ ऐसे होते हैं जिनकी लिखी हुई बातें लोगों के दिल में उतर जाती है। अमृता प्रीतम उन्हीं चुनिंदा लेखकों में से एक थीं। उन्होंने सिर्फ कविताएं और कहानियां नहीं लिखीं, बल्कि अपने समय की औरत के मन, उसके दर्द, प्रेम, अकेलेपन और सपनों को शब्द दिए। उन्होंने जिंदगी को भी उसी बेबाकी से जिया, जिस बेबाकी से लिखा। समाज की बनाई लकीरों को मानने के बजाय उन्होंने अपनी राह खुद चुनी।

‘लोकावतरण’ वैदिक शास्त्रों और लोक दोनों की आपसी समृद्धि का प्रतीक है – संतोष...

भोपाल : 26 अगस्त/ सुप्रसिद्ध कवि , अनुवादक, लोक विदुषी तथा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी डॉ. ममता खेड़े की पुस्तक "लोकावतरण " का लोकार्पण 26...

हिंदी को वैश्विक मंच देने की दिशा में विश्व रंग अंतरराष्ट्रीय हिंदी ओलंपियाड 2026

भोपाल : 22 अगस्त/ हिंदी भाषा के वैश्विक प्रचार-प्रसार, भारतीय भाषाई-सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा नई पीढ़ी को हिंदी से जोड़ने के उद्देश्य से...

खरी बात