“उनके हिस्से का प्रेम” में रिश्तों की विडंबना तो “गरीबनवाज” में दिखा उद्यमी का...
भोपाल : 29 अक्टूबर/ कथाकार संतोष चौबे की दो कहानियों 'उनके हिस्से का प्रेम' और 'ग़रीबनवाज़' का मंचन प्रख्यात नाट्य निर्देशक देवेन्द्र राज अंकुर...
संतोष चौबे ने किया ‘मगर शेक्सपियर को याद रखना’ कहानी का यादगार पाठ, कहानी...
भोपाल : 27 अक्टूबर/ वरिष्ठ कवि–कथाकार, निदेशक विश्व रंग एवं रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री संतोष चौबे के नए कहानी संग्रह 'ग़रीबनवाज़' का...
जन्मदिन विशेष : जिनके शब्दों ने हिंदी साहित्य को दी नई दृष्टि, निर्भीक लेखिका...
नई दिल्ली, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। हिंदी साहित्य की दुनिया में मृदुला गर्ग एक ऐसा नाम है, जिन्होंने अपने लेखन से न सिर्फ परंपराओं को चुनौती दी बल्कि पाठकों को सोचने पर मजबूर किया। समान रूप से हिंदी और अंग्रेजी दोनों में लेखन करने वाली मृदुला गर्ग ने लगभग हर विधा में अपनी रचनात्मकता का परिचय दिया है। आठ उपन्यास, चार नाटक, चार निबंध संग्रह, एक संस्मरण, एक यात्रा वृत्तांत और 90 से अधिक कहानियां, यह उनकी अब तक की सृजन-यात्रा का प्रमाण हैं।
RNTU और विश्वरंग फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में श्रीलंकाई कलाकारों द्वारा रावण पर केंद्रित...
भोपाल : 23 अक्टूबर/ रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल एवं विश्वरंग फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में श्रीलंका के प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भव्य नृत्य नाटक...
‘मोदीज मिशन’ : वडनगर से प्रधानमंत्री कार्यालय तक के सफर पर किताब होगी लॉन्च
नई दिल्ली, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की असाधारण जिंदगी और राजनीतिक सफर पर लिखी गई बायोग्राफी की लिस्ट में 'मोदीज मिशन' नाम की एक नई किताब भी शामिल होने वाली है। इस किताब को शुक्रवार को मुंबई में लॉन्च किया जाएगा।
रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय और विश्वरंग फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में कल प्रस्तुत होगा श्रीलंकाई...
भोपाल : 22 अक्टूबर/ रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल एवं विश्वरंग फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में श्रीलंका के प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भव्य नृत्य नाटक...
जनता की आवाज का शायर: अदम गोंडवी और ‘चमारों की गली’ का विद्रोह
मुंबई, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)। अदम गोंडवी, जिनका वास्तविक नाम रामनाथ सिंह था, हिंदी साहित्य के उन चुनिंदा कवियों में से एक हैं जिन्होंने अपनी तीखी और साहसी कविताओं के माध्यम से सामाजिक अन्याय, गरीबी, जातिवाद और राजनीतिक भ्रष्टाचार को निशाना बनाया। उनका जन्म 22 अक्टूबर 1947 को उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के अट्टा परसपुर गांव में एक गरीब किसान परिवार में हुआ था।
विशेष: पद्मश्री प्रो. दिगंबर हांसदा, संविधान का ‘ओलचिकी’ में किया अनुवाद, ‘संथाल’ की रहे...
रांची, 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। संथाली साहित्य के विमर्श में आत्मसम्मान और सांस्कृतिक चेतना केंद्र बिंदु में रहे हैं। झारखंड के संथाल परगना में देवघर, गोड्डा, पाकुड़, साहिबगंज और दुमका जैसे जिले शामिल हैं, और यहां की शख्सियतों में डॉ. दिगंबर हांसदा किसी 'पूज्य' व्यक्तित्व से कम नहीं हैं।
साहित्य के नोबेल पुरस्कार 2025 का ऐलान, हंगरी के लास्जलो क्रास्जनाहोरकाई को मिला...
नई दिल्ली, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। स्वीडिश एकेडमी ने गुरुवार को साहित्य के नोबेल पुरस्कार का ऐलान कर दिया। इन पुरस्कारों की घोषणा शाम 4:30 बजे की गई। इस बार साहित्य के नोबेल पुरस्कार से हंगरी के लास्जलो क्रास्जनाहोरकाई को सम्मानित किया गया है। यह अवॉर्ड उन लेखकों को मिलता है, जिन्होंने शानदार किताबें या कविताएं लिखकर साहित्य में खास योगदान दिया हो। 1954 में जन्मे हैं।
‘एक दीया, जो बुझा नहीं’, कैलाश सत्यार्थी की वह कहानी जो इतिहास बन गई
नई दिल्ली, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। यह सिर्फ एक पुरस्कार की कहानी नहीं है। यह उस लड़ाई की गवाही है, जो एक इंसान ने उन लाखों बच्चों के लिए लड़ी, जिनकी आवाज कोई नहीं सुनता था। यह कहानी है कैलाश सत्यार्थी की, एक ऐसा नाम, जिसने न सिर्फ बच्चों की आजादी की अलख जगाई, बल्कि दुनिया को यह बताया कि बदलाव की शुरुआत एक अकेले दीये से भी हो सकती है।










