यादों में रेणु : ‘मैला आंचल’ के ‘गुलफाम’, समाज, साहित्य और सादगी को साधने...
नई दिल्ली, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। हर साल की 11 अप्रैल कैलेंडर पर दर्ज सिर्फ एक तारीख नहीं है। यह तारीख उस आवाज की खामोशी का प्रतीक है जिसने गांव, खेत, गंध, लोक और मनुष्य के छोटे-छोटे सुख-दुख को शब्दों में ऐसा ढाला कि वे हमेशा के लिए जीवंत हो गए। साल 1977 में 11 अप्रैल को ही साहित्यकार फणीश्वरनाथ रेणु का निधन हुआ था। इस दिन उनकी आवाज हमेशा के लिए खामोश जरूर हो गई, लेकिन उनकी लिखावट आज भी रंगमंच से लेकर लोगों के जीवन में उपस्थित है।
‘पाठ श्रृंखला’ के अंतर्गत ‘सविता भार्गव’ के उपन्यास ‘जहाज पाँच पाल वाला’ पर हुई...
भोपाल : 7 अप्रैल/ वनमाली सृजन पीठ और आईसेक्ट पब्लिकेशन द्वारा 'पाठ श्रृंखला' के अंतर्गत सविता भार्गव' के उपन्यास 'जहाज पाँच पाल वाला' पर...
कश्मीरी लाल जाकिर : बंटवारे के दर्द और पीड़ा को शब्दों में समेटने वाले...
नई दिल्ली, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। कश्मीर की पीड़ा, बंटवारे के घाव और समाज की असमानताओं को अपनी कलम के जरिए बयां करने वाले साहित्यकार थे कश्मीरी लाल जाकिर। शायर से लेखक बने जाकिर साहब ने अपनी रचनाओं में सिर्फ कहानियों को ही शामिल नहीं किया, बल्कि उस दौर की सामाजिक, राजनीतिक और मानवीय पीड़ा को भी दर्ज किया जो आज भी पाठकों को सोचने पर मजबूर करती है।
उपराष्ट्रपति ने सुधा मूर्ति की पुस्तक का किया विमोचन, बोले-भारत हमेशा से एक रहा...
नई दिल्ली, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने बुधवार को नई दिल्ली के संविधान सदन में लोकसभा सचिवालय द्वारा प्रकाशित और राज्यसभा सांसद सुधा मूर्ति द्वारा लिखित पुस्तक 'टाइड्स ऑफ टाइम: हिस्ट्री थ्रो म्यूरल्स इन पार्लियामेंट' का विमोचन किया।
‘जी हां हुजूर, मैं गीत बेचता हूं’, जब एक कवि ने खुद को गीतफरोश...
नई दिल्ली, 28 मार्च (आईएएनएस)। सहज लेखन और सहज व्यक्तित्व का नाम है, भवानी प्रसाद मिश्र। कविता और साहित्य के साथ-साथ राष्ट्रीय आंदोलन में...
द ग्रेट एस्केप: सुरंग, साहस और सजा! द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान फरारी की...
नई दिल्ली, 23 मार्च (आईएएनएस)। नाजी जर्मनी के कड़े सुरक्षा वाले युद्धबंदी शिविर स्टालाग लुफ्ट तृतीय से 70 से अधिक मित्र राष्ट्रों के सैनिकों का सुरंग बनाकर भाग निकलना इतिहास में 'द ग्रेट एस्केप' के नाम से दर्ज है। 24 मार्च 1944 की रात हुई ये साधारण फरारी नहीं थी, बल्कि महीनों की गुप्त योजना, इंजीनियरिंग कौशल और असाधारण साहस का परिणाम थी।
राही मासूम रजा: मुस्लिम लेखक जिसने महाभारत की पटकथा लिखकर साबित किया कि कला...
नई दिल्ली, 14 मार्च (आईएएनएस)। बात 1980 के दशक के उत्तरार्ध की है। दूरदर्शन पर बीआर चोपड़ा भारत के सबसे बड़े महाकाव्य 'महाभारत' को पर्दे पर उतारने की तैयारी कर रहे थे। जब यह घोषणा हुई कि इस पवित्र हिंदू महाकाव्य के संवाद एक मुस्लिम लेखक लिखेंगे, तो हंगामा मच गया। सवाल उठा, "क्या कोई हिंदू विद्वान नहीं बचा जो एक मुसलमान हमारे धर्मग्रंथ की पटकथा लिखेगा? उस लेखक ने कोई रक्षात्मक जवाब नहीं दिया, बल्कि एक ऐसी गर्जना की जिसने सभी की बोलती बंद कर दी।
हर दिल का श्रंगार है होली
नैना शर्मारंगों का त्योहार है होली,
खुशियों की बहार है होली।
लाल, गुलाबी, नीला, पीला,
हर दिल का श्रृंगार है होली।मिठाई की मिठास है इसमें,
अपनों का विश्वास...
दुनिया को ‘उल्टे चश्मे’ से देखने वाले कलमकार, जिनका मानना था हास्य कटु नहीं,...
मुंबई, 28 फरवरी (आईएएनएस)। गुजराती साहित्य के हास्य सम्राट तारक जनुभाई मेहता दुनिया को सीधे नहीं, बल्कि 'उल्टे चश्मे' से देखते थे। उनकी कलम ने समाज की कमियों पर हल्का-फुल्का व्यंग्य किया, लेकिन कभी कटुता नहीं अपनाई। उनका मानना था कि हास्य कटु नहीं, मिठास भरा होना चाहिए, जो हंसाते हुए दिल को छूए और सोचने पर मजबूर करे।
स्मृति शेष: कवि जॉन कीट्स, जिनका नाम ‘पानी पर लिखा था’ और वह इतिहास...
नई दिल्ली, 22 फरवरी (आईएएनएस)। "मेरा हृदय पीड़ा से भरा है, और एक जड़ता मुझे घेर रही है…" यह पंक्तियां महान अंग्रेजी रोमांटिक कवि जॉन कीट्स की प्रसिद्ध कविता 'ओड टू अ नाइटिंगेल' का हिंदी भावानुवाद हैं। इन शब्दों में जीवन की क्षणभंगुरता और आत्मा की गहरी उदासी का स्वर गूंजता है। विडंबना यह रही कि जिस कवि ने जीवन और मृत्यु के रहस्यों को इतनी संवेदनशीलता से उकेरा, वह 25 वर्ष की आयु में 23 फरवरी 1821 को इस दुनिया से विदा हो गया।




