ईडी ने गुरुग्राम की रियल एस्टेट कंपनी की 51.57 करोड़ की संपत्तियां अटैच कीं, होमबायर्स के फंड के दुरुपयोग का मामला

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नई दिल्ली, 6 जनवरी (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले में गुरुग्राम की रियल एस्टेट कंपनी मेसर्स ओशन सेवन बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ी 51.57 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है।

यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 के तहत की गई है। जांच में पता चला है कि कंपनी ने सस्ते घरों की परियोजनाओं के लिए होमबायर्स से जमा कराई गई रकम का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया।

ईडी की जांच दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा और हरियाणा पुलिस द्वारा दर्ज कई एफआईआर पर आधारित है। इनमें धोखाधड़ी, विश्वासघात, जालसाजी और आपराधिक साजिश के आरोप हैं। कंपनी ने होमबायर्स से समय पर घर बनाने और सौंपने का वादा करके बड़ी रकम जुटाई थी, लेकिन परियोजनाएं अधूरी रह गईं। कई आवंटन मनमाने तरीके से रद्द कर दिए गए और होमबायर्स को नुकसान उठाना पड़ा। जमा फंड को निर्माण के बजाय अन्य कामों में डायवर्ट कर दिया गया।

अटैच की गई संपत्तियों में 49.79 करोड़ रुपए की अचल संपत्तियां शामिल हैं। इनमें गुरुग्राम, हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र में एक विला, होटल, रिसॉर्ट, ऑफिस स्पेस और कई भूमि पार्सल हैं। इसके अलावा 1.78 करोड़ रुपए की चल संपत्तियां भी अटैच की गई हैं, जिनमें जब्त कैश और कंपनी के प्रमोटर स्वराज सिंह यादव तथा संबंधित संस्थाओं के बैंक खातों में जमा राशि शामिल है।

जांच से सामने आया है कि कंपनी के प्रमोटर स्वराज सिंह यादव ने इस पूरी योजना में मुख्य भूमिका निभाई। उनके निर्देश पर होमबायर्स से जमा फंड को प्रोजेक्ट के एस्क्रो खातों से निकालकर अन्य खातों में ट्रांसफर किया गया। कानूनी सुरक्षा नियमों को दरकिनार करते हुए एक ही फ्लैट को बार-बार ऊंची कीमत पर बेचा गया। पार्किंग स्पेस और रद्द इकाइयों को भी ज्यादा दाम पर बेचा गया। रद्दीकरण को जायज दिखाने के लिए फर्जी दस्तावेज बनाए गए। डायवर्ट किए गए पैसे को और लेयरिंग करके व्यक्तिगत खर्चों, संपत्ति खरीदने और अन्य कामों में इस्तेमाल किया गया। यह होमबायर्स के भरोसे का स्पष्ट दुरुपयोग है।

ईडी का कहना है कि कंपनी ने होमबायर्स की मेहनत की कमाई को जानबूझकर गलत तरीके से इस्तेमाल किया और अवैध कमाई की। आगे की जांच जारी है। इस कार्रवाई से प्रभावित होमबायर्स को उम्मीद है कि उन्हें न्याय मिलेगा। कई खरीदार सालों से अपने घर का इंतजार कर रहे हैं और अब कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। ईडी की यह एक्शन रियल एस्टेट सेक्टर में धोखाधड़ी के मामलों पर सख्ती का संकेत है।