Friday, June 19, 2026
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हर मराठी किरदार के पीछे गहरी मेहनत होती है : मनोज बाजपेयी

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मुंबई, 11 दिसंबर (आईएएनएस)। मशहूर अभिनेता मनोज बाजपेयी ने हाल ही में मेटामॉर्फोसिस आयोजन में शिरकत की। इस आयोजन में उन्होंने मराठी फिल्में और किरदार करने के बारे में खुलकर बातचीत की।

अभिनेता ने साल 1998 की फिल्म सत्या में एक मराठी किरदार भीखू म्हात्रे निभाया था, जिसे लोगों ने काफी पसंद भी किया था। अभिनेता ने आयोजन में कहा कि उन्होंने भीखू म्हात्रे के साथ-साथ कई मराठी किरदार किए हैं।

उन्होंने कहा, “मैंने सिर्फ भीखू म्हात्रे का मराठी किरदार नहीं निभाया है, बल्कि ‘अलीगढ’ और भोसले में भी मराठी किरदार निभाया था और अभी हाल ही में इंस्पेक्टर शिंदे में भी मेरा मराठी किरदार था।”

अभिनेता ने बताया कि मराठी किरदार करने के पीछे कितनी मेहनत लगती है। उन्होंने कहा, “मराठी किरदार सिर्फ मराठी बोलने से ही बनता है। मैं जब रोल करता हूं, तो सबसे पहले देखता हूं कि वह महाराष्ट्र के किस क्षेत्र से है।”

उन्होंने ‘अलीगढ़’ के किरदार का उदाहरण देते हुए बताया, “मैंने फिल्म अलीगढ़ में रामचंद्र का किरदार निभाया था। वे नागपुर के रहने वाले थे, तो उनकी मराठी का सुर और लहजा अलग था। हमने उस किरदार को थोड़ा काव्यात्मक भी रखा था, क्योंकि वह व्यक्ति साहित्य और कविता समझने वाला था। इसलिए वह हर शब्द की अहमियत महसूस करता था। इसलिए उसका बोलने का अंदाज बिल्कुल अलग था।”

उन्होंने आगे कहा, “वहीं, इंस्पेक्टर शिंदे की मराठी बिल्कुल अलग थी। वे कहीं और से आते हैं, और भीखू म्हात्रे की बात करें तो वे मुंबई की चॉल में पले-बढ़े थे, तो उनका लहजा बिल्कुल अलग था। हम हर किरदार की बोलचाल पर पहले से रिसर्च करते हैं, फिर प्रैक्टिस शुरू करते हैं।”

मराठी फिल्मों में काम को लेकर अभिनेता ने कहा कि मराठी के कुछ डायलॉग को याद करके बोल देना और मराठी फिल्मों में काम करने में फर्क होता है।

उन्होंने कहा, “मैं हर भाषा का दिल से सम्मान करता हूं, और हिंदी और अंग्रेजी मेरी मूल भाषा भी नहीं हैं। मैंने इन्हें सीखा है और अभी भी सीख रहा हूं। मेरी मातृभाषा भोजपुरी है, जिसे मैं आज भी घरवालों और दोस्तों के साथ बोलता हूं।”

उन्होंने कहा, “युवावस्था में मैंने नई भाषाएं सीखना शुरू किया था और आज भी सीख रहा हूं। मराठी भी सीख रहा हूं, पर अभी भी नहीं कह सकता कि बहुत अच्छा बोल लेता हूं, लेकिन कोशिश हमेशा रहती है। हिंदी में लगातार काम करते-करते मैंने वह सीख ली।”