तेलंगाना गठन के बाद पहली बार केसीआर का परिवार चुनाव से दूर

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हैदराबाद, 25 मार्च (आईएएनएस)। तेलंगाना राष्ट्र समिति (अब भारत राष्ट्र समिति) के गठन के 23 साल बाद पहली बार पार्टी के संस्थापक के. चंद्रशेखर राव का परिवार लोकसभा चुनाव से दूर रह रहा है।

पूर्व मुख्यमंत्री या उनके परिवार के सदस्य ने 2004 के बाद से हर लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ा है।

ऐसी अटकलें थीं कि केसीआर के नाम से लोकप्रिय भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के अध्यक्ष या उनके बेटे के.टी. रामा राव या भतीजे टी. हरीश राव इस बार लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं। हालांकि तीनों विधायकों में से कोई भी मैदान में नहीं उतरा।

केसीआर की बेटी के. कविता, जो निज़ामाबाद लोकसभा क्षेत्र से 2019 का चुनाव हार गई थीं, भी इस बार चुनाव नहीं लड़ रही हैं। तेलंगाना विधान परिषद की सदस्य कविता को हाल ही में कथित दिल्ली आबकारी नीति घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गिरफ्तार किया गया था।

केसीआर, जिन्होंने 2001 में तेलंगाना आंदोलन को पुनर्जीवित करने के लिए तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) से इस्तीफा देकर तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) बनाई थी, 2004 में करीमनगर से लोकसभा के लिए चुने गए और केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में मंत्री बने। उन्होंने 2006 और 2008 में हुए उपचुनावों में यह सीट बरकरार रखी थी।

केसीआर 2009 में महबूबनगर से लोकसभा के लिए चुने गए। इसी कार्यकाल के दौरान वह तेलंगाना राज्य के लक्ष्य को हासिल करने में सफल रहे।

तेलंगाना में 2014 में टीआरएस की पहली सरकार बनने के बाद केसीआर मुख्यमंत्री बने। उनके बेटे और भतीजे, जो एक बार फिर विधानसभा के लिए चुने गए, उनके मंत्रिमंडल में मंत्री बने। साथ ही साथ हुए संसदीय चुनावों में केसीआर की बेटी कविता निज़ामाबाद से लोकसभा के लिए चुनी गईं।

टीआरएस ने 2018 में सत्ता बरकरार रखी, कविता 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा के धरमपुरी अरविंद से निज़ामाबाद लोकसभा सीट हार गईं। बाद में वह विधान परिषद के लिए चुनी गईं।

हाल के विधानसभा चुनावों में भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) को कांग्रेस के हाथों सत्ता गंवानी पड़ी।

हैदराबाद लोकसभा सीट से रविवार को गद्दाम श्रीनिवास यादव की उम्मीदवारी की घोषणा के साथ, बीआरएस ने 13 मई को सभी 17 सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए उम्मीदवारों की घोषणा कर दी।

पार्टी ने दावा किया है कि उसने तेलंगाना में लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चयन में सामाजिक संतुलन बनाए रखा है और इस तरह सभी वर्गों का विश्वास हासिल किया।

उम्मीदवारों की सूची पर नजर डालने से पता चलता है कि बीआरएस ने पिछड़ी जाति के छह, अनुसूचित जाति के तीन, अनुसूचित जनजाति के दो और अन्य जातियों के छह नेताओं को टिकट दिया है।

बीआरएस, जिसने 2019 में नौ सीटें हासिल की थीं, ने तीन मौजूदा सांसदों – नामा नागेश्वर राव (खम्मम), मलोथ कविता (महबूबाबाद) और मन्ने श्रीनिवास रेड्डी (महबूबनगर) को बरकरार रखा।

पांच मौजूदा सांसद दलबदल कर कांग्रेस या भाजपा में चले गए, जबकि एक मौजूदा सांसद हाल के चुनावों में विधानसभा के लिए चुने गये।

पार्टी का यह भी मानना है कि हालिया विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य भर में लोग केसीआर के शासन को याद कर रहे हैं।

इसमें कहा गया है, “इस संदर्भ में, पार्टी लोकसभा चुनावों में जीत दर्ज करने के लिए तैयार है।”

पार्टी ने उल्लेख किया कि कुछ उम्मीदवारों ने पहले ही निर्वाचन क्षेत्रों का दौरा करना और लोगों तक पहुंचना शुरू कर दिया है। इसमें दावा किया गया कि उन्हें लोगों का अच्छा समर्थन मिल रहा है।

पार्टी के प्रमुख नेता और जन प्रतिनिधि लोगों का समर्थन हासिल करने के लिए सभी निर्वाचन क्षेत्रों में व्यापक अभियान चलाने की तैयारी कर रहे हैं।

चुनाव अभियान तेज करने के लिए बीआरएस प्रमुख केसीआर खुद जल्द ही निर्वाचन क्षेत्रों का दौरा शुरू करेंगे।