Tuesday, May 26, 2026
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भारतीय मूल के शोधकर्ता ने की ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिजीज और मिर्गी से जुड़े जीन की खोज

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न्यूयॉर्क, 9 जनवरी (आईएएनएस)। भारतीय मूल के न्यूरोसाइंटिस्ट विजी संथाकुमार के नेतृत्व में शोधकर्ताओं की एक टीम ने एक जीन की खोज की है, जो ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिजीज और मिर्गी से जुड़े व्यावहारिक परिवर्तनों के विकास में योगदान देता है।

न्यूरोपिलिन2 नामक जीन मस्तिष्क में कोशिका अंतःक्रियाओं में शामिल एक रिसेप्टर को एनकोड करता है और तंत्रिका सर्किट के विकास को संचाल‍ित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

नेचर मॉलिक्यूलर साइकियाट्री में प्रकाशित अध्ययन भविष्य में उपचार के लिए एक मार्ग प्रदान करता है, जिसका उद्देश्य इन होने वाली स्थितियों के कुछ चुनौतीपूर्ण लक्षणों को कम करना है।

पहले के शोध ने न्यूरोपिलिन2 में उत्परिवर्तन को ऑटिज्म और मिर्गी जैसे तंत्रिका संबंधी विकारों से जोड़ा है, लेकिन इसमें शामिल तंत्र का पता चलना काफी हद तक अस्पष्ट रहे हैं।

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय-रिवरसाइड के संथाकुमार और उनके सहयोगियों ने न्यूरोपिलिन2 जीन को हटाने के परिणामों की जांच करने के लिए एक माउस मॉडल पर काम किया।

शोध में टीम ने पाया कि न्यूरोपिलिन2 की अनुपस्थिति न्यूरॉन्स के प्रवास को रोकती है, जिससे मस्तिष्क को मिलने वाले संकेतों में रुकावट आती है।

मोलेक्युलर सेल एंड सिस्टम्स बायोलॉजी के प्रोफेसर संथाकुमार ने कहा, “यह असंतुलन ऑटिज्म जैसे व्यवहार और दौरे के बढ़ते जोखिम की ओर ले जाता है।”

संथाकुमार ने कहा, “अध्ययन के परिणाम इस बात पर प्रकाश डालते हैं कि कैसे एक जीन मस्तिष्क में स्टिमुलेंट्स एंड इनहिबिटर्स दोनों प्रणालियों को प्रभावित कर सकता है। हम दिखाते हैं कि रिस्ट्रेनिंग सर्किट डेवलपमेंट को बाधित करना ऑटिज्म से संबंधित व्यवहार और मिर्गी को एक साथ होने के लिए काफी है।”

अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि न्यूरोनल विकास के विशिष्ट चरणों को लक्षित करने से चिकित्सीय हस्तक्षेप के लिए नए दरवाजे खुल सकते हैं, जो संभावित रूप से इन विकारों की शुरुआत को रोक सकते हैं।

संथाकुमार ने कहा, “निरोधक सर्किट गठन की भूमिका को अलग करके हम चिकित्सीय रणनीति विकसित करने में सक्षम हो सकते हैं जो ऑटिज्म से पीड़ित व्यक्तियों के लिए परिणामों को बेहतर बना सकते हैं, विशेष रूप से वे जो दौरे का अनुभव करते हैं।”

अध्ययन में संथाकुमार के साथ यूसी-रिवरसाइड के दीपक सुब्रमण्यन, एंड्रयू हुआंग और समीक्षा कोमाटिरेड्डी, तथा रटगर्स विश्वविद्यालय के कैरोल ईसेनबर्ग, जियोन बेक, हानिया नवीद, माइकल डब्ल्यू. शिफलेट और ट्रेसी एस. ट्रान भी शामिल थे।