‘लंबे समय की आईएमएफ बेलआउट योजना पाकिस्तान के लिए आर्थिक आपदा होगी’

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इस्लामाबाद, 24 मार्च (आईएएनएस)। पाकिस्तान की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था को संदेहास्‍पद मंदी से बचाने के लिए आईएमएफ (अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष) से एक्‍सटेंडेड फंड फैसिलिटी (ईएफएफ) के जरिए एक और बेलआउट योजना की आपातकालीन जरूरत है। हालांकि, एक आर्थिक विशेषज्ञ ने आईएमएफ की लंबे समय की योजना से जुड़ने के प्रति सचेत करते हुए इसे कर्ज का जाल बताया है और कहा है कि यह पाकिस्तान को दूसरे अर्जेंटीना में बदल देगा।

वरिष्ठ वित्तीय विशेषज्ञ और अर्थशास्त्री डॉ. अशफाक हसन खान ने आईएमएफ से लंबे समय की वित्तपोषण सुविधा लेने की नई सरकार की योजना पर गंभीर चिंता जताई है और उन्हें बेहद सतर्क रहने की चेतावनी दी है।

उन्होंने कहा, “पाकिस्तान को ज्‍यादा से ज्‍यादा तीन साल के लिए 3-4 अरब डॉलर के नए आईएमएफ लोन पैकेज की मांग करनी चाहिए, क्योंकि एक लंबा और बड़ा कार्यक्रम एक आर्थिक आपदा होगा, जो संभावित रूप से पाकिस्तान को एक और अर्जेंटीना बना देगा, जो कर्ज के जाल में फंस गया है।”

डॉ. अशफाक ने इस बात पर रोशनी डाली कि पाकिस्तान सरकार की पांच साल के कार्यक्रम के लिए 8 अरब डॉलर का कर्ज लेने की योजना एक आपदा होगी।

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, वित्तमंत्री मुहम्मद औरंगजेब की सरकार और आर्थिक टीम को परिपक्व ऋण चुकाने और नया ऋण लेने के लिए अपना समय और प्रयास लगाने के बजाय विशेष निवेश सुविधा परिषद (एसआईएफसी) से विदेशी निवेश आकर्षित करने और घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सुधारों को लागू करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।”

डॉ. अशफाक ने कहा कि आईएमएफ से लंबे समय की वित्त पोषण सुविधा लेने की हालत में पाकिस्तान की तुलना ‘भविष्य के अर्जेंटीना’ से करते हुए कहा कि अर्जेंटीना लगभग आधी सदी से आईएमएफ कार्यक्रम के अधीन है।

उन्होंने कहा, “अर्जेंटीना ने कार्यक्रम का आकार लगातार बढ़ाया है, जो अब 43 अरब डॉलर के करीब है और आईएमएफ का सबसे बड़ा ग्राहक बनकर उभरा है, इसलिए अर्जेंटीना कभी भी आईएमएफ के चंगुल से आजाद नहीं होगा।”

उन्होंने कहा, “पाकिस्तान को वही गलती नहीं करनी चाहिए। यह कभी न ख़त्म होने वाले कर्ज के जाल में तब्दील होने जा रहा है। यह आईएमएफ से जितनी बड़ी राशि उधार लेगा, पुनर्भुगतान उतना ही बड़ा होगा। हमारी विदेशी मुद्रा आय बड़ी राशि चुकाने के लिए पर्याप्त नहीं होगी। इसलिए हम आईएमएफ के कर्ज का आकार और बढ़ाएंगे, तब हालत अर्जेंटीना जैसी हो जाएगी।”

आईएमएफ ने पाकिस्तान के आर्थिक निर्णय लेने का निर्देश दिया है, क्योंकि वह अर्थव्यवस्था में बने रहने और वित्तीय शटडाउन से निपटने के लिए संघर्ष कर रहा है। आईएमएफ पाकिस्तान के प्रति सख्त रहा है, क्योंकि उसने किसी भी दीर्घकालिक बेलआउट के लिए पात्र होने से पहले सरकार के लिए कड़ी शर्तें रखी हैं।