Friday, July 3, 2026
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पीओजेके में चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था, डॉक्टरों ने 26 जनवरी से हड़ताल की दी चेतावनी

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इस्लामाबाद, 11 जनवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्वास्थ्य सुविधाओं की हालत भी दयनीय हो गई है। यूनाइटेड डॉक्टर्स फोरम (यूडीएफ) ने अधिकारियों को चेतावनी दी है कि अगर उनकी लंबे समय से लंबित और जायज मांगों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो 26 जनवरी से विरोध प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।

यूडीएफ पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन (पीएमए) और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में यंग डॉक्टर्स एसोसिएशन (वाईडीए) का एक संगठन है।

यूडीएफ चेयरमैन डॉ. वाजिद खान और जनरल सेक्रेटरी डॉ. अरशद राजा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस विरोध प्रदर्शन को लेकर चेतावनी दी। वाजिद और अरशद पीएमए और वाईडीए के प्रमुख हैं। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके साथ डॉ. वकार बट, डॉ. बशारत हयात, डॉ. आमिर इकराम, डॉ. राजा इम्तियाज और डॉ. बिलाल अहमद जैसे दूसरे पदाधिकारी भी थे।

पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, ये अधिकारी पाकिस्तानी सरकार के रवैये से परेशान हैं। इन्होंने स्वास्थ्य विभाग पर असर डालने और मेडिकल प्रोफेशनल्स का हौसला तोड़ने वाली वर्षों की देरी की आलोचना की।

उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि डॉक्टरों ने सब्र दिखाया है और अपनी समस्याओं के लिए सभी संवैधानिक, कानूनी और लोकतांत्रिक तरीकों का इस्तेमाल किया है। अधिकारी उनके मुद्दों को हल नहीं कर रहे हैं।

वाजिद खान ने कहा, “दुर्भाग्य से, हल होने के बजाय, हमारे मुद्दे और उलझते जा रहे हैं, और फैसले बार-बार टाले जा रहे हैं। इस तरह की देरी ने हेल्थकेयर सिस्टम को अनिश्चितता में डाल दिया है।”

यूडीएफ नेताओं ने कहा कि हेल्थ डिपार्टमेंट में प्रमोशन प्रक्रिया रुक गई है। 2019 से प्रमोशन के मामले पेंडिंग हैं, जिससे कई डॉक्टर बिना प्रमोशन के रिटायर हो गए हैं। उन्होंने हेल्थ के परमानेंट डायरेक्टर जनरल की गैरमौजूदगी को एक बड़ा मुद्दा बताया और इस बात पर जोर दिया कि विभाग को एडिशनल चार्ज के आधार पर नहीं चलाया जा सकता।

डॉन के अनुसार, यूडीएफ नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद जून 2022 से डॉक्टरों को वित्तीय फायदे और अलाउंस न मिलने पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि सरकारी अस्पतालों में मेडिकल सुविधाओं और मॉडर्न इक्विपमेंट की भारी कमी है। पूरे इलाके में सिर्फ एक एमआरआई मशीन होना बहुत चिंताजनक है।

उन्होंने महिला डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को दी जा रही सुरक्षा धमकियों, अस्पतालों में मारपीट की घटनाओं, एकतरफा जांच और पुलिस कार्रवाई पर भी चिंता जताई।

उन्होंने दावा किया, “ऐसी हर घटना में डॉक्टरों को बलि का बकरा बनाया जाता है, जो बहुत गलत है।”

यूडीएफ नेताओं ने घोषणा की कि पीओजेके में 26 जनवरी से दो घंटे की हड़ताल शुरू होगी और यह दो हफ्ते तक चलेगी। पूरे इलाके से 1,200 से ज्यादा डॉक्टरों के हड़ताल में शामिल होने की उम्मीद है। हड़ताल के दौरान, ओपीडी बंद रहेंगी जबकि इमरजेंसी सेवाएं जारी रहेंगी, लेकिन 2 फरवरी तक कार्रवाई न करने पर अस्पताल पूरी तरह बंद कर दिए जाएंगे।