Saturday, August 22, 2026
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पाकिस्तान का आर्थिक संकट गहराया, निर्यात में लगातार गिरावट

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नई दिल्ली, 6 जनवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर संकट और गहराता जा रहा है। दिसंबर में देश के निर्यात में 20.4 प्रतिशत की तेज गिरावट दर्ज की गई है। यह लगातार पांचवां महीना है जब पाकिस्तान के विदेशी बाजारों में भेजे जाने वाले सामान में कमी आई है। स्थानीय मीडिया में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, यह गिरावट अस्थायी नहीं बल्कि संरचनात्मक कारणों से जुड़ी है, जिसे अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

डॉन अखबार में प्रकाशित लेख में कहा गया है कि पाकिस्तान का कमजोर निर्यात प्रदर्शन हमेशा से उसके बाह्य क्षेत्र की स्थिरता में सबसे कमजोर कड़ी रहा है। हाल के वर्षों में यह समस्या और गंभीर हो गई है, क्योंकि विदेशी सरकारी और निजी फंडिंग के स्रोत सूखते जा रहे हैं, जिनके सहारे पिछली सरकारें भुगतान संतुलन की कमजोर स्थिति को संभालती रही थीं।

निर्यात में लगातार हो रही गिरावट से बाह्य क्षेत्र में सुधार की संभावनाओं पर खतरा बढ़ गया है। लेख में कहा गया है कि आयात में बढ़ोतरी से पिछले दो वर्षों में मांग को दबाकर हासिल की गई उपलब्धियां कमजोर पड़ सकती हैं।

पिछले महीने चालू वित्त वर्ष में पहली बार आयात 6 अरब डॉलर के स्तर को पार कर गया। यह संकेत देता है कि व्यापार सामान्यीकरण और उदारीकरण की नीतियों के चलते आयात मांग उम्मीद से कहीं तेजी से बढ़ी है।

हालांकि, कुल आयात में 118 मिलियन डॉलर की वृद्धि आकार में बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन निर्यात में तेज गिरावट के साथ मिलकर इसने मासिक व्यापार घाटे को 25 प्रतिशत बढ़ाकर 3.7 अरब डॉलर कर दिया है। जुलाई-दिसंबर की छह माह की अवधि में 19.2 अरब डॉलर का व्यापार घाटा दर्ज किया गया, जो पिछले साल की तुलना में 35 प्रतिशत अधिक है।

लेख में कहा गया है कि स्टेट बैंक फिलहाल मजबूत रेमिटेंस और डॉलर खरीद के जरिए व्यापार घाटे को पाटने और विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने की कोशिश कर सकता है। लेकिन संरचनात्मक रूप से बढ़ते व्यापार घाटे को इस रणनीति से संभालना जोखिम भरा है, क्योंकि इससे बाह्य खाता भू-राजनीतिक झटकों और विदेशों में श्रम बाजार में बदलाव के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है।

इसके अलावा, लगातार हस्तक्षेप कर भंडार बढ़ाने से घरेलू तरलता सख्त होती है और विनिमय दर पर दबाव बढ़ता है। निर्यात में गिरावट केवल बाह्य क्षेत्र की स्थिरता के लिए ही खतरा नहीं है, बल्कि यह नीति निर्माताओं को एक और भुगतान संतुलन संकट से बचने के लिए आर्थिक वृद्धि को दबाने पर मजबूर करती है।

लेख के अनुसार, ताजा व्यापार आंकड़े यह साफ तौर पर दिखाते हैं कि स्थिरीकरण और दीर्घकालिक टिकाऊपन के बीच एक गंभीर अंतर बना हुआ है।