शोधकर्ताओं ने ‘सिजोफ्रेनिया’ के लिए विकसित किया रक्त परीक्षण

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सैन फ्रांसिस्को, 10 फरवरी (आईएएनएस)। एक गंभीर मानसिक बीमारी ‘सिजोफ्रेनिया’ के लिए शोधकर्ताओं की एक टीम ने एक नया रक्त परीक्षण विकसित किया हैै, जो इस बीमारी के खतरे की भविष्यवाणी के साथ उपचार के रास्‍ते भी खोलेगा।

मॉलिक्यूलर साइकिएट्री जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, नया रक्त परीक्षण किसी व्यक्ति के रक्त में बायोमार्कर की पहचान करता है जो ‘सिजोफ्रेनिया’ के लिए उनकी वर्तमान गंभीरता और भविष्य के जोखिम को निष्पक्ष रूप से माप सकता है और उसके लिए उन उपचारों के रास्‍ते भी खोजता है, जो महत्‍पूूूूर्ण रूप से प्रभावी भी होंगे।

इंडियाना यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के एमडी, पीएचडी, प्रोफेसर और अध्ययन के वरिष्ठ लेखक अलेक्जेंडर निकुलेस्कु ने कहा, “शुरुआत में सिजोफ्रेनिया की पहचान करना कठिन है, लेकिन शुरुआत से ही लोगों को सही उपचार देना बहुत महत्वपूर्ण है।”

अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने उन मनोरोग रोगियों का परीक्षण किया, जिन्‍हें वे एक दशक से अधिक समय से देख रहे थे। उन्होंने ऐसे बायोमार्कर की पहचान की जो उच्च मतिभ्रम और उच्च भ्रम की स्थिति के साथ-साथ भविष्य के मनोरोग अस्पताल में भर्ती होने की भविष्यवाणी कर रहे थे।

उन्होंने पाया कि सर्वोत्तम बायोमार्कर मतिभ्रम या भ्रम वाले किसी व्यक्ति का मूल्यांकन करने के लिए उपयोग किए जाने वाले मानक पैमानों की तुलना में अधिक पूर्वानुमानित थे, जिसका अर्थ है कि इस बायोमार्कर परीक्षण का उपयोग मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन से व्यक्तिपरकता और अनिश्चितता को कम करने में मदद कर सकता है।

निकुलेस्कु ने कहा, “कुछ मौजूदा दवाएं काफी अच्छी तरह से काम करती हैं, अगर उन्हें सही रोगियों में जल्दी शुरू किया जाए।”

उन्होंने कहा, ”सामाजिक समर्थन भी सर्वोपरि है और एक बार वह और दवाएं उपलब्ध हो जाएं तो मनोवैज्ञानिक समर्थन और थेरेपी भी मदद कर सकती है। इसकी असामान्यताओं के बारे में समझने और लागू करने के लिए अभी भी बहुत कुछ बाकी है।”