Saturday, July 11, 2026
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अमेरिकी डॉक्टरों ने समय से पहले पैदा हुए बच्चों की नाल में प्लास्टिक की मात्रा पाई अधिक

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नई दिल्ली, 31 जनवरी (आईएएनएस)। अमेरिका में डॉक्टरों की एक टीम ने एक चौंकाने वाले अध्ययन में समय से पहले जन्मे शिशुओं के प्लेसेंटा में माइक्रोप्लास्टिक्स और नैनोप्लास्टिक्स की उच्च सांद्रता पाई है।

माइक्रोप्लास्टिक्स 5 मिलीमीटर से भी कम और नैनोप्लास्टिक्स एक मीटर के अरबवें हिस्से में मापा जाता है। यह नग्न आंखों से नहीं दिखाई देता। ये पर्यावरण में व्यापक रूप से फैले हुए हैं।

पिछले शोधों से पता चला है कि प्लास्टिक का इस्तेमाल सामान्यतः पर्यावरण और मनुष्य दोनों के लिए हानिकारक है।

बेलर कॉलेज ऑफ मेडिसिन, टेक्सास चिल्ड्रेंस हॉस्पिटल और न्यू मैक्सिको विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की टीम ने पाया कि समय से पूर्व जन्मे प्लेसेंटा में माइक्रोप्लास्टिक्स और नैनोप्लास्टिक्स का स्तर काफी अधिक था।

वे मानव रक्त में पहले मापे गए स्तर से भी कहीं अधिक ऊंचे स्तर पर थे। इससे पता चला कि गर्भावस्था के दौरान प्लेसेंटा में प्लास्टिक जमा होने की संभावना थी और समय से पहले जन्म के मामलों में इसका जोखिम और संचय अधिक होता था।

प्रमुख लेखक एनरिको आर. बरोजो ने कहा, “समय से पहले जन्मे बच्चों में प्लेसेंटा की उच्च सांद्रता का पाया जाना आश्चर्यजनक था, क्योंकि यदि यह गर्भावस्था की अवधि का परिणाम होता तो आप जो अपेक्षा करते, वह इसके विपरीत होती।”

एनरिको आर. बरोजो ह्यूस्टन के बेलर कॉलेज ऑफ मेडिसिन और टेक्सास चिल्ड्रेंस हॉस्पिटल में प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में सहायक प्रोफेसर हैं।

टीम ने कहा कि समय से पहले जन्म लेने वाले शिशुओं की तुलना में समय से पहले जन्म लेने वाले शिशुओं के प्लेसेंटा में अधिक माइक्रोप्लास्टिक और नैनोप्लास्टिक होते हैं।

प्रेग्नेंसी जर्नल में प्रकाशित सार में टीम ने कहा, “इससे इस संभावना की ओर संकेत मिलता है कि प्लास्टिक का संचय समय से पहले जन्म के जोखिम और घटना में योगदान दे सकता है।”

टीम ने 175 प्लेसेंटा का विश्लेषण करने के लिए अत्यधिक संवेदनशील मास स्पेक्ट्रोमेट्री का उपयोग किया तथा उनकी तुलना नियत समय पर एकत्रित 100 प्लेसेंटा तथा समय से पूर्व एकत्रित 75 प्लेसेंटा (गर्भावस्था के 37 सप्ताह से कम) से की।

यह अध्ययन माइक्रोप्लास्टिक्स और नैनोप्लास्टिक्स के विरुद्ध बढ़ते प्रमाणों में शामिल है, जो हृदय रोग से लेकर संभावित स्ट्रोक तक हो सकते हैं।

टीम ने कहा कि यह मानव स्वास्थ्य और बीमारी पर प्लास्टिक के संपर्क के वास्तविक जोखिम को दर्शाता है। यह अध्ययन अमेरिका के कोलोराडो में चल रही सोसायटी फॉर मैटरनल-फेटल मेडिसिन (एसएमएफएम) की वार्षिक बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा।