गुरुग्राम, 22 अगस्त (आईएएनएस)। एम्स दिल्ली के पूर्व निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया ने कहा कि एच1एन1 के मामले बढ़ रहे हैं, लेकिन इससे किसी को घबराने की जरूरत नहीं है। स्थिति पूरी तरह से हमारे नियंत्रण में है। इसके लक्षण बहुत ही सामान्य प्रवृत्ति के होते हैं। यह एक तरह का बुखार है, जो मूलत: इन्फ्लुएंजा के कारण होता है। इससे पहले इसे लेकर महामारी भी आ चुकी है। इस वजह से हमारे अंदर प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो चुकी है।
डॉ रणदीप गुलेरिया ने शनिवार को समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि इसके लक्षण मूल रूप से बुखार होता है। इसके बाद नजला, खांसी और जुकाम जैसे लक्षण भी देखने को मिलते हैं। इसके अलावा, अगर स्थिति गंभीर होती है तो शरीर या सिर में दर्द जैसे लक्षण भी हो सकते हैं। कुछ लोगों में पेट खराब और उल्टी जैसे लक्षण भी देखने को मिल सकते हैं। वहीं, बच्चों की बात करें तो उनमें सुस्ती भी आ सकती है। वो हर काम को लेकर काफी निष्क्रिय महसूस कर सकते हैं। हालांकि, हमारे लिए यह जरूरी हो जाता है कि हम इस बीमारी को लेकर समय रहते लक्षण की पहचान कर लें। अगर हम ऐसा कर लेते तो हमारे लिए आगे की पूरी प्रक्रिया आसान हो जाती है। पांच से चार दिन तक बुखार रहने के बाद ये खुद व खुद ठीक हो जाता है।
इसके अलावा, उन्होंने इससे जुड़े गंभीर लक्षण की भी बात की। अगर चार से पांच दिनों तक बुखार रहे, साथ ही, सांस लेने में तकलीफ हो, छाती में दर्द हो, उल्टी ज्यादा हो रही है, या ऑक्सीजन की कमी हो रही है, तो यह स्थिति काफी गंभीर हो सकती है। अगर आपने समय पर ध्यान नहीं दिया तो आपको निमोनिया हो सकता है।
बच्चों में इसके कैसे लक्षण हो सकते हैं? डॉ. रणदीप गुलेरिया ने इस संबंध में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि अगर बच्चा सुस्त हो जाए या अच्छे से खाना नहीं खा रहा हो, तो ऐसी स्थिति में पेरेंट्स को उसे फौरन डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए। अगर किसी व्यक्ति में सर्दी-जुकाम जैसे लक्षण हैं, तो ऐसी स्थिति में उसे घर से बाहर जाने से गुरेज करना चाहिए, क्योंकि इससे यह अन्य व्यक्तियों में फैल सकता है।
उन्होंने कहा कि अगर किसी में इस तरह के लक्षण दिख रहे हैं तो उसे विशेष सावधानी बरतनी होगी। जैसे, मास्क लगाकर रखें और अपने हाथ धोते रहिए। अगर आपको खांसी आ रही है तो मुंह ढंकें। इससे उससे जुड़े वायरस वातावरण में फैलेंगे नहीं।
डॉ गुलेरिया ने उन लोगों को इस वायरस से अलर्ट रहने के लिए कहा, जिनकी उम्र कम या बहुत ज्यादा है। इसके अलावा, जिनकी इम्यूनिटी कमजोर है। ऐसे लोगों को यह वायरस जल्दी से चपेट में ले सकता है। गंभीर रूप से निमोनिया भी हो सकता है। ऐसे लोगों का शुगर लेवल बढ़ सकता है या हार्ट फेल भी हो सकता है। ऐसे लोगों को अपना विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर आईसीएमआर का डेटा देखें तो मानसून के मौसम में ऐसे मामले बढ़ जाते हैं। इस साल भी बढ़े हैं। पिछले साल भी बढ़े थे।

