प्रदूषण के कारण 800 मीटर की ऊंचाई तक फैलता है घना कोहराः आईआईटी रिसर्च

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नई दिल्ली, 23 मार्च (आईएएनएस)। सर्दियों के दौरान उत्तर भारत के एक बड़े हिस्से में घना कोहरा छा जाता है। इस कोहरे पर अब आईआईटी मद्रास ने एक महत्वपूर्ण रिसर्च की।

रिसर्च के मुताबिक यह कोहरा केवल ठंड या जलवायु परिवर्तन ही नहीं, प्रदूषण की वजह से भी ज्यादा बनता है। यह घना कोहरा कई बार इतना अधिक होता है कि सूरज की रोशनी को जमीन तक भी नहीं पहुंचने देता। यही वजह है कि दिल्ली जैसे शहर कई बार पूरा दिन धुंधले रहते हैं। इससे फ्लाइट्स लेट हो जाती हैं, ट्रेनें रद्द हो जाती हैं या धीमी चलती हैं और सड़कों पर वाहनों का चलना भी मुश्किल हो जाता है।

आईआईटी मद्रास के वैज्ञानिकों ने यह जानकारी दी है कि उत्तर भारत में सर्दियों के दौरान बनने वाला घना कोहरा केवल ठंड या जलवायु परिवर्तन की वजह से नहीं, बल्कि प्रदूषण की वजह से भी ज्यादा बनता है और यह काफी लंबे समय तक बना रहता है।

दरअसल, सर्दियों की रातों में जब हवा बहुत धीमी या लगभग शांत होती है, तब गाड़ियों, फैक्ट्रियों और धूल से निकलने वाले सूक्ष्म प्रदूषक कण जमीन के पास ही जमा हो जाते हैं। जैसे ही तापमान गिरता है, हवा में मौजूद नमी इन कणों से चिपक जाती है और बहुत छोटी-छोटी पानी की बूंदों में बदल जाती है। इन बूंदों की संख्या इतनी अधिक होती है कि वे रोशनी को रोक देती हैं और घना कोहरा बन जाता है, जिससे सामने कुछ भी साफ दिखाई नहीं देता।

इन बूंदों के बनने के दौरान एक तरह की छिपी हुई गर्मी निकलती है, जिसे गुप्त ऊष्मा कहा जाता है। यही गर्मी कोहरे को ऊपर की ओर फैलने में मदद करती है, जिससे यह 600 से 800 मीटर तक ऊंचा फैल सकता है। सुबह के समय यह घना कोहरा एक परत की तरह काम करता है और कई बार सूरज की रोशनी को जमीन तक पहुंचने नहीं देता। जब धूप नहीं पहुंचती, तो जमीन गर्म नहीं हो पाती और कोहरा भी जल्दी खत्म नहीं होता। यही वजह है कि कई बार पूरा दिन धुंधला बना रहता है। इससे जन जीवन काफी प्रभावित होता है। पारिवारिक व्यवस्था ठप्प हो जाती है।

शोधकर्ताओं के मुताबिक अगर कोहरा एक दिन ज्यादा समय तक बना रहता है, तो अगली रात भी जमीन ठंडी रहती है और फिर से कोहरा बनने की स्थिति बन जाती है। इस तरह एक चक्र बन जाता है, जिसमें प्रदूषण और कोहरा एक-दूसरे को बढ़ाते रहते हैं। पहले वैज्ञानिकों का मानना था कि कोहरे की बढ़ती समस्या का मुख्य कारण जलवायु परिवर्तन है, लेकिन अब यह समझ में आया है कि स्थानीय स्तर पर मौजूद प्रदूषण भी इसमें उतनी ही बड़ी भूमिका निभाता है।

इस शोध की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अगर वायु प्रदूषण को कम किया जाए, तो सर्दियों में कोहरे की समस्या भी काफी हद तक कम हो सकती है। इस नई समझ से मौसम का पूर्वानुमान बेहतर किया जा सकेगा और हवाई यात्राओं तथा परिवहन सेवाओं को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जा सकेगा। शोधकर्ताओं की मानें तो सर्दियों का घना कोहरा सिर्फ मौसम का नहीं, बल्कि प्रदूषण का भी परिणाम है।