Thursday, July 23, 2026
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21 जुलाई लोकतंत्र के लिए काला दिन, सरकार की उलटी गिनती शुरू: विजय वडेट्टीवार

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मुंबई, 22 जुलाई (आईएएनएस)। नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन और राहुल गांधी समेत कांग्रेसी नेताओं पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर महाराष्ट्र कांग्रेस विधायक विजय वडेट्टीवार ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 21 जुलाई काला दिन था और लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है।

मीडिया से बातचीत के दौरान कांग्रेस विधायक विजय वडेट्टीवार ने कहा कि इतने दिनों तक बच्चे प्रदर्शन कर रहे थे और कोई उनसे मिलने तक नहीं गया। यह सरकार क्रूर है। यह सरकार बातचीत नहीं चाहती, जबकि बातचीत के जरिए इस मामले को सुलझाया जा सकता था।

उन्होंने कहा कि जब बच्चे सड़क पर उतरे तो उनके हाथ में कोई शस्त्र नहीं था, लेकिन फिर भी बच्चों की पिटाई हुई। उन्हें प्रताड़ित किया गया।

विजय वडेट्टीवार ने कहा कि धरने पर बैठे राहुल गांधी को हिरासत में लेने की क्या जरूरत थी? ये लोग राहुल गांधी से डरते हैं। युवा उनके साथ हैं। सरकार के जाने के दिन आ रहे हैं। उलटी गिनती शुरू हो गई है।

उन्होंने कहा कि कुर्सी पर बैठा शख्स न्याय नहीं कर सकता। वह बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्री असंवेदनशील हैं। क्या इन लोगों की कोई जिम्मेदारी नहीं है? इतने पेपर लीक हो रहे हैं तो इसे ठीक करने का काम किसका है? मंत्री का या अधिकारी का? मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए।

बता दें कि इससे पहले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, छात्रों के विरोध प्रदर्शन और शिक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।

राहुल गांधी ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर छात्रों का क्या कसूर है। उनके अनुसार, छात्र शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रख रहे हैं और केवल एक निष्पक्ष एवं भरोसेमंद शिक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि छात्र लगातार मानसिक दबाव से गुजरते हैं और परीक्षा से ठीक पहले पेपर लीक जैसी घटनाओं की जानकारी मिलती है, जिससे उनकी वर्षों की मेहनत पर पानी फिर जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि कई छात्र इस तनाव के कारण आत्महत्या तक कर चुके हैं।

राहुल गांधी ने दावा किया कि कभी दुनिया की बेहतर शिक्षा प्रणालियों में गिनी जाने वाली भारतीय शिक्षा व्यवस्था अब भरोसे के संकट से जूझ रही है। उनका आरोप था कि पिछले एक दशक में 152 बार विभिन्न परीक्षाओं के पेपर लीक हुए, यानी औसतन हर महीने एक बड़ी घटना सामने आई।