कानपुर, 16 सितंबर (आईएएनएस)। गैंगस्टर विकास दुबे की मौत के करीब छह साल बाद आखिरकार उसका मृत्यु प्रमाण पत्र (डेथ सर्टिफिकेट) जारी कर दिया गया है। प्रमाण पत्र में दर्ज त्रुटि को ठीक कराने के लिए उसकी पत्नी ऋचा दुबे को हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
विकास दुबे की 10 जुलाई 2020 को पुलिस एनकाउंटर में मौत हुई थी। हालांकि, मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होने की प्रक्रिया एक तकनीकी गलती के कारण वर्षों तक अटकी रही। जानकारी के अनुसार, पोस्टमार्टम हाउस से जारी बॉडी डिस्पोजल स्लिप में विकास दुबे के पिता का नाम गलत दर्ज कर दिया गया था।
परिजनों का आरोप है कि जहां विकास दुबे के पिता का सही नाम रामकुमार दुबे था, वहीं दस्तावेजों में राजकुमार दुबे दर्ज कर दिया गया। इसी त्रुटि के कारण मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नहीं हो सका और परिवार को कई प्रशासनिक तथा कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
विकास दुबे की पत्नी ऋचा दुबे लंबे समय से दस्तावेजों में सुधार और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कराने के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रही थीं। उनका कहना था कि प्रमाण पत्र नहीं मिलने से परिवार को कई गंभीर दिक्कतें आ रही थीं।
गौरतलब है कि 3 जुलाई 2020 की रात कानपुर के बिकरू गांव में विकास दुबे और उसके साथियों ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया था, जिसमें आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। इस घटना के बाद विकास दुबे फरार हो गया था। बाद में उसे मध्य प्रदेश के उज्जैन से गिरफ्तार किया गया था। विकास दुबे द्वारा किए गए कृत्य से पूरे देश के लोगों में जबरदस्त आक्रोश था। वह कई दिनों तक फरार रहा। इसके बाद वह उज्जैन के महाकाल मंदिर परिसर से पकड़ा गया था। जब उसे कानपुर लाया जा रहा था, तो कानपुर के पास में ही गाड़ी पलटने के बाद हुई मुठभेड़ में उसकी मौत हो गई थी।
10 जुलाई 2020 को कानपुर लाते समय पुलिस वाहन पलटने के बाद हुई मुठभेड़ में विकास दुबे की मौत हो गई थी। इसके बाद उसकी पत्नी ऋचा दुबे ने कई बार सार्वजनिक रूप से कहा था कि दस्तावेजों में हुई त्रुटियों के कारण उन्हें मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
