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7,756 मीटर की ऊंचाई पर लहराया तिरंगा व अर्जेंटीना का झंडा

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नई दिल्ली, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। तमाम मुश्किलों को पार करते हुए भारतीय और अर्जेंटीना की सेनाओं के पर्वतारोहियों ने हिमालय की दो ऊंची चोटियों पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की। दोनों देशों की संयुक्त पर्वतारोहण मुहिम के सफल समापन के बाद सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने मंगलवार को नई दिल्ली में अभियान के सदस्यों का स्वागत किया। सैन्य दल ने हिमालय की बर्फ से ढकी ऊंची चोटियों तेज हवाओं, जमा देने वाली ठंड और रास्ते में बेहद जटिल रास्तों को पार किया है।

इस संयुक्त दल ने 17 सितंबर को 7,355 मीटर ऊंची माउंट अबी गामिन और इसके बाद 21 सितंबर को 7,756 मीटर ऊंची माउंट कामेट को फतह किया। उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित माउंट कामेट, कंचनजंगा और नंदा देवी के बाद भारत की तीसरी सबसे ऊंची चोटी है। इस अभियान में कुल 35 सदस्य शामिल थे। इसका नेतृत्व लेफ्टिनेंट कर्नल चिराग चटर्जी ने किया। इस दल में भारतीय सेना के 25 और अर्जेंटीना की सेना के 10 जवान शामिल थे। अभियान की शुरुआत 21 अगस्त को नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर से हुई थी।

इसके बाद सैन्य दल हिमालय के बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में पहुंचा। पर्वतारोहियों को रास्ते में कड़ाके की ठंड, तेज हवाओं, बर्फ से ढके मैदानों, खड़ी चट्टानों और गहरी बर्फीली दरारों जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। ऊंचाई बढ़ने के साथ हर कदम जोखिम भरा होता गया। इसके बावजूद दोनों सेनाओं के पर्वतारोहियों ने आपसी तालमेल और हौसले के साथ आगे बढ़ते हुए दोनों चोटियों पर सफलतापूर्वक पहुंच बनाई।

यह दोनों सेनाओं का तीसरा संयुक्त पर्वतारोहण अभियान था। इससे पहले जनवरी 2025 में अर्जेंटीना के मेंडोजा में 6,962 मीटर ऊंची माउंट एकॉनकागुआ और अगस्त 2025 में लद्दाख की सुरू घाटी में 7,077 मीटर ऊंची माउंट कुन पर दोनों देशों के सैनिकों ने एक साथ चढ़ाई की थी। लगातार हो रहे इन अभियानों से दोनों सेनाओं के बीच पेशेवर सहयोग और आपसी समझ मजबूत हुई है। साथ ही कठिन ऊंचाई वाले क्षेत्रों में एक साथ काम करने का अनुभव भी बढ़ा है।

माउंट अबी गामिन और माउंट कामेट की सफल चढ़ाई ने दोनों देशों के पर्वतारोहियों की शारीरिक क्षमता, तकनीकी दक्षता, मानसिक मजबूती और आपसी तालमेल की परीक्षा भी ली। दोनों चोटियों को सफलतापूर्वक फतह करना इस बात का प्रमाण है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी दोनों सेनाएं साथ मिलकर प्रभावी ढंग से काम कर सकती हैं।

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक यह अभियान सिर्फ दो ऊंची चोटियों को जीतने की कहानी नहीं है। यह भारत और अर्जेंटीना की सेनाओं के बीच बढ़ते भरोसे, दोस्ती और सहयोग की भी एक बेहतरीन मिसाल बन गया है।