अहमदाबाद, 5 नवंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 9 नवंबर को अपने लोकसभा क्षेत्र के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे करीब 1,024 करोड़ रुपए की लागत वाले 30 विकास कार्यों का उद्घाटन या शुभारंभ करेंगे। इन परियोजनाओं में 1,200 घरों का आवंटन, ड्रेनेज और वाटर प्रोजेक्ट सहित कई महत्वपूर्ण काम शामिल हैं।
अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी) की स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन कमलेश पटेल ने इन विकास कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि 9 नवंबर को अमित शाह अपने संसदीय क्षेत्र में आएंगे। इस दौरान कुल 30 परियोजनाओं का लोकार्पण या शुभारंभ किया जाएगा। इन सभी कार्यों की कुल लागत लगभग 1,024 करोड़ रुपए है। इनमें सबसे प्रमुख 1,200 घरों का आवंटन है। साथ ही, ड्रेनेज और वाटर प्रोजेक्ट से जुड़े कार्य भी शामिल हैं। इन परियोजनाओं से क्षेत्र में विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
छठ पूजा की तैयारियों को लेकर कमलेश पटेल ने बताया कि अहमदाबाद में यह पर्व बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। खास तौर पर बिहार और उत्तर प्रदेश से जुड़े लोग इसमें बड़ी संख्या में हिस्सा लेते हैं। उन्होंने कहा कि पहले हर साल साबरमती नदी के किनारे इंदिरा ब्रिज के पास छठ पूजा का आयोजन किया जाता था, लेकिन फिलहाल वहां रिवरफ्रंट का काम चल रहा है। ऐसे में लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए नगर निगम ने वैकल्पिक व्यवस्था की है।
उन्होंने बताया कि कॉर्पोरेशन की ओर से शहर के आठ क्षेत्रों में पानी के कुंड तैयार किए गए हैं। इन स्थानों पर रोशनी की व्यवस्था की गई है। कई जगह स्टेज भी बनाए गए हैं, ताकि अलग-अलग क्षेत्रों के लोग अपने नजदीक ही छठ पूजा का उत्सव धूमधाम से मना सकें। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य श्रद्धालुओं को सुविधा देना और त्योहार के आयोजन को व्यवस्थित बनाना है।
कांकरिया में दो नई मेड-इन-इंडिया टॉय ट्रेन की शुरुआत भी अहमदाबाद के लिए एक खास आकर्षण होगी। कमलेश पटेल ने बताया कि कांकरिया के रीडेवलपमेंट के बाद वर्ष 2008 में नागरिकों की सुविधा और मनोरंजन के लिए दो टॉय ट्रेन चलाई गई थीं। उस समय करीब आठ करोड़ रुपए खर्च करके विदेश से दो ट्रेनें मंगाई गई थीं, जो अब तक संचालित हो रही थीं। उन्होंने बताया कि अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया आह्वान के तहत भारत में निर्मित दो नई टॉय ट्रेन तैयार की गई हैं। इनकी लागत करीब 3.59 करोड़ रुपए आई है। पुरानी आयातित ट्रेनों की तुलना में नई ट्रेनों पर लगभग 40 प्रतिशत कम खर्च हुआ है। इन्हें आने वाले 10 से 15 दिनों में नागरिकों की सेवा के लिए समर्पित किया जाएगा।
नई ट्रेनों की विशेषता बताते हुए पटेल ने कहा कि पहले इस्तेमाल की जा रही ट्रेनें विदेश से लाई गई थीं। उन्हें देखने और उनकी कार्यप्रणाली को समझने के बाद स्थानीय जरूरतों के अनुसार बदलाव करके भारत में नई ट्रेनें बनाई गई हैं। उन्होंने पुरानी आयातित ट्रेन का नाम अटल एक्सप्रेस बताते हुए कहा कि भारत में निर्मित यह पहली टॉय ट्रेन है और यह काफी अच्छी है।
