नई दिल्ली, 13 जून (आईएएनएस)। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने अपनी ऑपरेशनल क्षमता को और अधिक मजबूत करने के लिए व्यापक ट्रेनिंग और क्षमता निर्माण कार्यक्रम चलाए हैं। सीआईएसएफ लगातार नई सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप अपने जवानों को तैयार कर रही है।
सीआईएसएफ के आधिकारिक ‘एक्स’ अकाउंट पर शनिवार को जारी पोस्ट में बताया गया कि बल ड्रोन और काउंटर-ड्रोन ऑपरेशंस, साइबर सुरक्षा, इंडस्ट्रियल फायरफाइटिंग, आपदा प्रबंधन और लीडरशिप डेवलपमेंट जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में एडवांस्ड ट्रेनिंग दे रहा है। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से सीआईएसएफ के जवानों की क्षमता और दक्षता में निरंतर सुधार हो रहा है।
फोर्स ने भारतीय सेना के साथ मिलकर ‘बैटल इनोक्यूलेशन ट्रेनिंग प्रोग्राम’ भी चलाया है। इस विशेष प्रशिक्षण का उद्देश्य जवानों को युद्ध जैसी कठिन परिस्थितियों के लिए मानसिक रूप से तैयार करना है। इस कार्यक्रम में शामिल जवानों की मुश्किल हालात में मानसिक मजबूती, स्थिति की सही समझ और त्वरित व सही निर्णय लेने की क्षमता काफी बढ़ गई है।
सीआईएसएफ देश के महत्वपूर्ण औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर, हवाई अड्डों, बंदरगाहों, परमाणु संयंत्रों, मेट्रो रेल और अन्य संवेदनशील स्थानों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालती है। फोर्स इन जगहों पर उभर रही नई सुरक्षा चुनौतियों जैसे ड्रोन हमले, साइबर खतरे और औद्योगिक आपदाओं से निपटने के लिए अपने कर्मियों को लगातार अपडेटेड ट्रेनिंग प्रदान कर रहा है।
सीआईएसएफ महानिदेशक ने हाल ही में फोर्स की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा था कि आधुनिक सुरक्षा परिदृश्य में पारंपरिक सुरक्षा के साथ-साथ तकनीकी और मानसिक तैयारी भी उतनी ही जरूरी है। इसी सोच के साथ सीआईएसएफ ने अपने प्रशिक्षण कार्यक्रमों को पूरी तरह नया रूप दिया है।
बल के प्रवक्ता ने बताया कि ये ट्रेनिंग कार्यक्रम न सिर्फ जवानों की व्यावसायिक दक्षता बढ़ा रहे हैं, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास और लचीलापन भी प्रदान कर रहे हैं। सीआईएसएफ देश के आर्थिक विकास और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

