नई दिल्ली, 22 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय तैराकी की दुनिया में आरती साहा का नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित है। आरती ने बहुत ही छोटी उम्र में तैराकी की दुनिया में अपनी अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई थी।
आरती साहा का जन्म 24 सितंबर 1940 में कोलकाता में हुआ था। आरती ने महज 4 साल की उम्र में तैराकी शुरू कर दी थी और 5 साल की उम्र में अपनी पहली तैराकी प्रतियोगिता जीती थी। आरती ने एक अन्य मशहूर भारतीय तैराक सचिन नाग के मार्गदर्शन में तैराकी की बारीकियां सीखी थीं। सचिन नाग एशियन गेम्स चैंपियन और ओलंपियन थे। साहा ने घरेलू स्तर पर कई प्रतियोगिताएं जीती। साल 1951 में आरती साहा ने 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक में नेशनल रिकॉर्ड हासिल किया। इसके बाद उनका चयन 1952 में ओलंपिक के लिए भारतीय दल में हुआ था।
महज 11 साल 10 महीने की उम्र में उन्होंने ओलंपिक में भाग लेकर इतिहास रचा था। वह साहा ओलंपिक में हिस्सा लेने वाली सबसे युवा भारतीय हैं। साहा महिलाओं की 200 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक हीट में उतरीं। वह 3:40.8 सेकेंड के साथ हीट में छठे स्थान पर रहीं, लेकिन सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई करने में कामयाब नहीं हो सकीं।
इसके अलावा, उन्होंने महज 19 साल की उम्र में इंग्लिश चैनल पार करने की बड़ी उपलब्धि हासिल की थी। वह इंग्लिश चैनल को पार करने वाली पहली एशियन महिला एथलीट हैं। साहा ने अगस्त 1959 में पहला प्रयास किया था। उन्हे सफलता नहीं मिली थी। 29 सितंबर 1959 को अपने दूसरे प्रयास में 16 घंटे 20 मिनट तक तैरने के बाद 42 मील की दूरी तय करते हुए साहा ने इंग्लिश चैनल पार किया था।
‘पद्मश्री’ सम्मान पाने वाली साहा पहली भारतीय महिला खिलाड़ी हैं। उन्हें भारत सरकार ने 1960 में इस सम्मान से सम्मानित किया था। 23 अगस्त 1994 को उनका निधन हो गया। सरकार ने 1998 में उनके सम्मान में डाक टिकट जारी किया था।

