Friday, August 14, 2026
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आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार रक्षा क्षेत्र के जरिए सेना का आधुनिकीकरण : राजनाथ सिंह

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नई दिल्ली, 14 अगस्त (आईएएनएस)। आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार रक्षा क्षेत्र के जरिए सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। शुक्रवार को यह बात रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कही। उन्होंने कहा कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहलों से पिछले 12 वर्षों में देश के रक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया है। भारत अब अपनी सुरक्षा जरूरतों को प्रभावी ढंग से पूरा करने के साथ ही वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र और रक्षा उपकरणों का निर्यातक देश बन रहा है।

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर 14 अगस्त को आकाशवाणी के माध्यम से सैनिकों को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि 2014 में देश का रक्षा उत्पादन महज 46,000 करोड़ रुपये था। वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये हो गया। यानी पिछले एक दशक में इसमें करीब चार गुना वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि रक्षा क्षेत्र में हुए संरचनात्मक बदलावों का प्रमाण है। कुल रक्षा उत्पादन में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और अन्य सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं की हिस्सेदारी करीब 76 प्रतिशत रही। वहीं निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़कर 24 प्रतिशत हो गई, जो पिछले वित्त वर्ष में 22 प्रतिशत थी।

राजनाथ सिंह ने कहा कि निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी रक्षा क्षेत्र में लगातार बेहतर होते कारोबारी माहौल का संकेत है। राजनाथ सिंह ने कहा कि वित्त वर्ष 2013-14 में भारत का रक्षा निर्यात केवल 686 करोड़ रुपये था। वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये पहुंच गया। इसमें 5,500 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। उन्होंने इसे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का सबसे प्रभावी प्रमाण बताया।

उन्होंने कहा, “आज भारत में 145 रक्षा निर्यातक हैं और हमारे उत्पाद 80 से अधिक देशों को निर्यात किए जा रहे हैं। मुझे विश्वास है कि हम 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात के लक्ष्य को हासिल कर लेंगे।” रक्षा मंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2013-14 में रक्षा बजट 2.53 लाख करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2026-27 में बढ़कर 7.85 लाख करोड़ रुपए हो गया है। यह भविष्य की रक्षा प्रौद्योगिकियों के प्रति भारत की बढ़ती प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उन्होंने बताया कि पूंजीगत व्यय भी 94,588 करोड़ रुपये से बढ़कर 2.19 लाख करोड़ रुपये हो गया है। अनुसंधान और विकास पर भी सरकार का जोर बढ़ा है। वित्त वर्ष 2014-15 में अनुसंधान एवं विकास का बजट 15,283 करोड़ रुपये था। वित्त वर्ष 2026-27 में यह 90 प्रतिशत बढ़कर 29,100 करोड़ रुपये हो गया है। राजनाथ सिंह ने कहा कि पिछले एक वर्ष में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने 8.75 लाख करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं के लिए आवश्यकता की स्वीकृति दी है। यह रक्षा आधुनिकीकरण पर सरकार के जोर को दर्शाता है।

उन्होंने रक्षा खरीद में किए गए बुनियादी सुधारों का भी उल्लेख किया। इनमें फील्ड कमांडरों की वित्तीय सीमा को दोगुना करना शामिल है, ताकि अभियानगत क्षमता मजबूत हो सके।उन्होंने कहा कि राजस्व मद के माध्यम से 1.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक की खरीद को भी सुगम बनाया गया है। इससे स्वदेशीकरण को बढ़ावा मिलेगा। रक्षा मंत्री ने आत्मनिर्भरता की दिशा में सशस्त्र बलों की सक्रिय भागीदारी की सराहना की। उन्होंने कहा कि स्वदेशी युद्धपोत, विमान और उन्नत सैन्य प्रणालियां रक्षा बलों की क्षमताओं को मजबूत कर रही हैं।

उन्होंने कहा, “उन्नत अग्नि मिसाइल का एमआईआरवी प्रौद्योगिकी से लैस होकर परीक्षण सफल होना रणनीतिक प्रतिरोधक क्षमता में एक नया आयाम जोड़ता है।” उन्होंने लंबी दूरी की जमीन पर हमला करने वाली क्रूज मिसाइल, रुद्र-2 हवा से सतह पर मार करने वाली मिसाइल, नौसैनिक पोत रोधी मिसाइल-एसआर और पिनाका लंबी दूरी की निर्देशित रॉकेट प्रणाली के सफल परीक्षणों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जो हाइपरसोनिक मिसाइल प्रौद्योगिकी विकसित करने में सक्षम हैं।

उन्होंने स्वदेशी ‘कुश’ लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल के पहले सफल परीक्षण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इससे देश की वायु रक्षा क्षमता और मजबूत हुई है। रक्षा मंत्री ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास सरकार का प्रमुख क्षेत्र है। इसका उद्देश्य रक्षा तैयारियों को मजबूत करने के साथ सीमावर्ती इलाकों में संपर्क और कनेक्टिविटी बढ़ाना है। उन्होंने प्राकृतिक आपदा के समय राहत और बचाव कार्यों में सशस्त्र बलों की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि देश हो या विदेश, दुर्भाग्यपूर्ण प्राकृतिक आपदा आने पर सशस्त्र बल हमेशा ‘पहले प्रतिक्रिया देने वालों’ में रहते हैं।

–आईएएनएस

जीसीबी/पीएम