एसीबी ने मंत्रालय में एफडीए क्लर्क को 35 हजार रुपए की रिश्वत लेते किया गिरफ्तार

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मुंबई, 13 फरवरी (आईएएनएस)। भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (एसीबी) ने महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) में कार्यरत एक क्लर्क को राज्य सचिवालय, मंत्रालय में कथित तौर पर 35,000 रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा। एसीबी अधिकारी ने शुक्रवार को इस मामले की जानकारी दी।

महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने दावा किया कि क्लर्क राजेंद्र धेरंग को एक कैबिनेट मंत्री के कार्यालय में गिरफ्तार किया गया था और इस घटना ने भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के तहत व्याप्त व्यापक भ्रष्टाचार को उजागर किया।

हालांकि, एसीबी अधिकारी ने स्पष्ट किया कि क्लर्क राजेंद्र धेरंगे को मंत्रालय की दूसरी मंजिल पर स्थित एफडीए कार्यालय में रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया था।

अधिकारी ने बताया कि क्लर्क ने कथित तौर पर शिकायतकर्ता से 50,000 रुपए की मांग की थी, जो अपना मेडिकल लाइसेंस बहाल करवाना चाहता था।

शिकायतकर्ता की ओर से एसीबी से संपर्क करने के बाद एक जाल बिछाया गया और गुरुवार शाम को धेरंगे को उसके कार्यालय में 35,000 रुपए की राशि लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया।

अधिकारी ने बताया कि उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है और जांच जारी है।

सपकाल ने मांग की कि मुख्यमंत्री इस मामले को गंभीरता से लें और रिश्वत लेने वाले मंत्री को हटा दें।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है कि एसीबी ने मंत्रालय में एक कैबिनेट मंत्री के कार्यालय में जाल बिछाकर एक भ्रष्ट अधिकारी को हिरासत में लिया है। एक बार फिर यह स्पष्ट हो गया है कि अत्यधिक भ्रष्ट महायुति सरकार के कार्यकाल के दौरान मंत्रालय में खुलेआम रिश्वतखोरी और कमीशन का खेल चल रहा है।

उन्होंने कहा, “ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जहां जनता का काम बिना पैसे के नहीं हो पाता। यह एक अत्यंत गंभीर मामला है। मुख्यमंत्री को संबंधित मामले का संज्ञान लेना चाहिए, जनता को सूचित करना चाहिए और रिश्वतखोर मंत्री को पद से हटाना चाहिए।”

भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो ने लोगों से अपील की है कि अगर कोई सरकारी कर्मचारी किसी काम को करने के एवज में कोई राशि मांगता है तो उसकी जानकारी एसीबी को दी जाए, जिससे राशि लेने वालों के ऊपर कार्रवाई की जा सके।