अचार और चटनी समेत कपड़े के बैग बनाकर आत्मनिर्भर बन रहीं महिलाएं

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नाहन, 11 मार्च (आईएएनएस)। कुछ करने के लिए बस हौसला चाहिए, अगर आपके पास है तो आप कुछ भी हासिल कर सकते हैं। हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं ने ऐसा ही करके दिखाया है। कल तक परिवार पर निर्भर रहने वाली महिलाएं आज भारत सरकार की योजनाओं का लाभ लेकर आत्मनिर्भर बन रही हैं।

स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं द्वारा तैयार किए गए विभिन्न उत्पादों को प्रदर्शित किया जा रहा है। उत्पादों की बढ़ती डिमांड और बिक्री के चलते अब महिलाओं की आर्थिक स्थिति काफी मजबूत हो गई है। केंद्र की मोदी सरकार द्वारा चलाई गई विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाकर आज महिलाएं स्वावलंबी बनी हैं।

आदर्श स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिला बबीता कौशल ने बताया कि महिलाएं स्वावलंबी बन रही हैं। उन्होंने बताया कि समूह द्वारा तैयार किए गए विभिन्न खाद्य पदार्थ जेम, अचार, चटनी समेत कपड़े के बैग आदि प्रदर्शित किए जा रहे हैं। बाजार में इन उत्पादों की काफी डिमांड है और उत्पादों के अच्छे दाम मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाकर आज महिलाएं स्वावलंबी बनी हैं।

उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूह में हर चीज का प्रशिक्षण दिया गया है। इससे जुड़कर महिलाएं काम कर रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं। महिलाओं को स्कीम से काफी लाभ मिल रहा है। रोजगार मिलने से महिलाएं बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। हमारे समूह में 50 से 60 महिलाएं हैं। एक समूह खेती कर रहा है तो दूसरा समूह अचार बनाने का काम कर रहा है। हम लोगों ने आपस में काम बांट लिया। पहले अपने उत्पादों को शहर तक ले जाने में काफी दिक्कत होती थी, लेकिन समय-समय पर होने वाले कार्यक्रमों में हम अपने उत्पादों को लेकर जाते हैं, कार्यक्रम में स्टॉल लाकर प्रदर्शित करते हैं। इससे हमारे उत्पादों की मार्केटिंग भी हो जाती है।

ग्राम पंचायत फूलपुर निवासी पार्वती देवी ने बताया कि वह ओम नमः शिवाय स्वयं सहायता समूह के साथ कार्य कर रही हैं। महिलाएं यहां विभिन्न खाद्य पदार्थों समेत अन्य उत्पाद बना रही हैं, जिसे स्टॉल पर प्रदर्शित किया जाता है। महिलाओं द्वारा तैयार किए गए सभी खाद्य पदार्थ ऑर्गेनिक हैं और लोगों को बेहद पसंद आते हैं। केंद्र सरकार द्वारा चलाई गई योजनाओं का लाभ उठाकर महिलाएं विभिन्न कार्य कर रही हैं, और आज महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं।