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अखिलेश का बड़ा फैसला : गोरखपुर सपा के जिला-महानगर अध्यक्ष बर्खास्त, फ्रंटल संगठनों की कार्यकारिणी भी भंग

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गोरखपुर, 4 अक्टूबर (आईएएनएस)। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गोरखपुर में पार्टी संगठन को लेकर बड़ा फैसला लिया है। पार्टी नेतृत्व ने गोरखपुर के जिला और महानगर संगठन के साथ-साथ सभी फ्रंटल संगठनों की कार्यकारिणियों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। इस कार्रवाई की जद में जिला स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक गोरखपुर से जुड़े पार्टी पदाधिकारी और सदस्य भी आए हैं।

पार्टी की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, गोरखपुर के जिलाध्यक्ष और पूरी जिला कार्यकारिणी तथा महानगर अध्यक्ष और महानगर कार्यकारिणी को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया है। इसके साथ ही सभी फ्रंटल संगठनों के जिलाध्यक्ष, महानगर अध्यक्ष, कार्यकारिणी के पदाधिकारी और सदस्यों की जिम्मेदारियां भी खत्म कर दी गई हैं।

सपा के इस फैसले का दायरा केवल गोरखपुर के स्थानीय संगठन तक सीमित नहीं है। आदेश में गोरखपुर से संबंधित समाजवादी पार्टी की राज्य कार्यकारिणी के सभी पदाधिकारियों और सदस्यों के साथ-साथ फ्रंटल संगठनों की प्रदेश कार्यकारिणी के पदाधिकारियों और सदस्यों को भी तत्काल प्रभाव से भंग किए जाने की बात कही गई है।

पार्टी के आदेश में कहा गया है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष की अनुमति से समाजवादी पार्टी जनपद गोरखपुर के जिलाध्यक्ष सहित जिला कार्यकारिणी, महानगर अध्यक्ष सहित महानगर कार्यकारिणी, फ्रंटल संगठनों के सभी जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष तथा उनकी कार्यकारिणियों के पदाधिकारी एवं सदस्यगण तत्काल प्रभाव से भंग किए जाते हैं। इसके अलावा गोरखपुर से जुड़ी समाजवादी पार्टी की राज्य कार्यकारिणी और सभी फ्रंटल संगठनों की प्रदेश कार्यकारिणी के पदाधिकारी एवं सदस्यों को भी पदमुक्त किया गया है।

यह फैसला ऐसे समय आया है जब शनिवार को गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब में आयोजित सपा की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पार्टी नेताओं के बीच विवाद सामने आया था। प्रेस कॉन्फ्रेंस में बैठने को लेकर शुरू हुआ विवाद कथित तौर पर गाली-गलौज और हाथापाई तक पहुंच गया। इस दौरान पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष के साथ मारपीट और थप्पड़ मारे जाने का मामला सामने आया था।

घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आया और पार्टी के भीतर संगठनात्मक अनुशासन को लेकर सवाल उठने लगे। इसके बाद पार्टी नेतृत्व की ओर से गोरखपुर के संगठन को व्यापक स्तर पर भंग करने का निर्णय लिया गया।